नयी दिल्ली , जनवरी 13 -- भारत में बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों की रोकथाम के लिए केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए यहां मंगलवार को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से संचालित दुनिया में अपनी तरह का पहला टूल 'रक्षा' लॉन्च किया है। यह टूल बच्चों की तस्करी (ट्रैफिकिंग), बाल विवाह और बाल यौन शोषण व दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री (सी-सीम) की पहचान और रोकथाम के लिए तैयार किया गया है। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट से पहले 'रक्षा' को लॉन्च किया गया है, जो 16 से 20 फरवरी 2026 के बीच आयोजित होगा।
इस एआई आधारित टूल का शुभारंभ केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी तथा वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने 'प्रॉस्पेरिटी फ्यूचर्स: चाइल्ड सेफ्टी टेक समिट' में किया। यह सम्मेलन जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) द्वारा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से आयोजित किया गया।
इस अवसर पर श्री प्रसाद ने कहा कि प्रौद्योगिकी का वास्तविक मूल्यांकन तभी है, जब वह समाज के सबसे संवेदनशील वर्गों की रक्षा करे। उन्होंने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं और यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि उन्हें एक सुरक्षित और सशक्त डिजिटल वातावरण मिले। 'रक्षा' इसी दिशा में एक मजबूत पहल है।
जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने बताया कि 'रक्षा' देशभर से बच्चों से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण कर संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करता है। यह टूल तस्करी और बाल विवाह के जोखिम वाले इलाकों का तत्कालीन समय के अनुसार निर्धारण (रियल टाइम मैपिंग) करता है, संगठित अपराध गिरोहों की निगरानी करता है और ऑनलाइन बाल यौन शोषण से जुड़े डिजिटल नेटवर्क को चिन्हित करने में मदद करता है।
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