कोलकाता , दिसंबर 11 -- पश्चिम बंगाल में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत चुनाव आयोग के पोर्टल पर अपलोड किए गए फॉर्म और डेटा का डिजिटलीकरण लगभग पूरा हो गया है, जिसमें कई श्रेणियों में 57.52 लाख से ज़्यादा मतदाताओं के नाम को हटाने के लिये चिह्नित किया गया है।

आयोग की ओर से बुधवार तक जुटाये गये आंकड़ों के अनुसार इस सूची में 24,14,750 मृत मतदाता, 11,57,889 ऐसे मतदाता जिनका पता नहीं चल सका, 19,89,914 मतदाताओं को अन्य जगहों पर चले जाने के तौर पर चिह्नित किया गया है, जबकि 1,35,627 फर्जी मतदाता और 54,027 'अन्य' श्रेणी में शामिल मतदाता शामिल हैं।

गौरतलब है कि देश के 12 राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर की प्रक्रिया चार नवंबर को शुरू हुयी थी। इसके तहत सभी गणना प्रपत्र 11 दिसंबर तक अपलोड किए जाने थे जिसके बाद 16 दिसंबर को मसौदा सूची प्रकाशित की जाएगी। अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 को जारी होने वाली है।

पश्चिम बंगाल सहित इन 12 राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग पाँच लाख मतदान केंद्र स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) इस काम में लगे हुए हैं, जिन्हें राजनीतिक पार्टियों द्वारा नियुक्त 12 लाख से ज़्यादा मतदान केंद्र स्तरीय एजेंट (बीएलए) मदद कर रहे हैं। आयोग ने कहा है कि बीएलओ को मसौदा मतदाता सूची में किसी भी शुरुआती गलती का पता लगाने और उसे ठीक करने के लिए मतदान केंद्र पर बीएलए के साथ बैठक करनी चाहिए।

चुनाव आयोग ने कहा है कि यह समन्यवय यह सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी है कि कोई भी योग्य मतदाता गलती से लिस्ट से बाहर न रह जाए। पश्चिम बंगाल में अब तक तैयार की गई सूची, जिसमें मृत, शिफ्ट हुए और लापता या जिनका पता नहीं चल पा रहा है, ऐसे वोटरों के नाम शामिल हैं, उन्हें राजनीतिक पार्टियों के बूथ एजेंटों को सौंपना होगा।

आयोग ने सभी 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे यह पक्का करें कि बीएलओ इन सूची को बीएलए के साथ साझा करें और उन्हें चुनाव आयोग की वेबसाइट पर भी अपलोड करें। बिहार के एसआईआर में जिन दिशानिर्देशों का पालन किया गया था, वे इस काम पर भी लागू होंगी।

आयोग ने बुधवार को जारी एक अधिसूचना में कहा कि मसौदा सूची प्रकाशित होने से पहले ये लिस्ट बीएलए को दिखाई जानी चाहिए। राजनीतिक पार्टियों के तय एजेंट्स को हटाये जाने वाले नामों की कॉपी दी जानी चाहिए। जिन मतदाताओं ने अपना पता कई बार बदला है, उन्हें सिर्फ़ उनकी मौजूदा जगह पर ही रखा जाएगा और पिछली सभी सूची से हटा दिया जाएगा।

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