पटना , जनवरी 11 -- िहार के विधि एवं स्वास्थ्य मंत्री और पश्चिम बंगाल भारतीय जनता पार्टी ( भाजपा) के प्रभारी मंगल पाण्डेय ने पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी के काफिले पर हुए जानलेवा हमले की कड़ी निंदा करते हुए रविवार को कहा कि बंगाल में भाजपा नेता एवं कार्यकर्ता सुरक्षित नहीं हैं। श्री पाण्डेय ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की आराजक सरकार हिंसा एवं अन्याय के बल पर सरकार चला रही है। उन्होंने कहा कि इस प्रदेश में सरकार के इशारे पर चुनावी हिंसा एवं गुंडागर्दी सत्ता की जरुरत बन चुकी है। यही वजह है कि चुनावी रण में जीत के लिए तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कार्यकर्ता अपने प्रतिद्वंदियों पर हमला एवं खून - खराबा पर उतर आते हैं। उन्होंने कहा कि यहां सत्ता संरक्षित टीएमसी के गुंडे अब भाजपा कार्यकर्ताओं व नेताओं को निशाना बना कर उन्हें डराना चाहते हैं, लेकिन ममता दीदी शायद यह भूल गई कि इस प्रदेश की जनता सबसे निडर है और अगामी विधानसभा चुनाव में उन्हें करारी शिकस्त देने का मन बना चुकी है।

श्री पांडेय ने कहा कि बंगाल में पश्चिम मेदिनीपुर के घाटाल के चंद्रकोना रोड पर शनिवार रात बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी के काफिले पर हमला अशोभनीय है। उन्होंने कहा कि राज्य में विपक्ष के नेता, कार्यकर्ता एवं जनता सुरक्षित नहीं हैं। अब गृह मंत्रालय ने भी इस मामले को लेकर रिपोर्ट मांगी है।

श्री पाण्डेय ने कहा कि भाजपा के वरिष्ठ नेता सुवेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर हमले का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि इस दौरान भाजपा तथा तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में जमकर मारपीट भी हुई और कई लोग जख्मी हो गए। उन्होंने कहा कि इस घटना के विरोध तथा आरोपितों की गिरफ्तारी की मांग पर श्री सुवेंदु ने चंद्रकोना पुलिस थाने में घरना भी दिया, लेकिन सत्ता में बैठे लोग बदमाशों के समर्थन में हैं। यह घटना उस समय घटी जब पुरुलिया से लौटते समय सुवेंदु का स्वागत करने के लिए भाजपा कार्यकर्ता खड़े थे। उन्होंने नौ लोगों के खिलाफ थाने में एफआइआर दर्ज कराई है। उन्होंने मांग की कि हमले की जांच कर राज्य सरकार उचित दंडनात्मक कार्रवाई करे।

भाजपा पश्चिम बंगाल के प्रभारी ने कहा कि बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई के दौरान भी अराजक स्थित सामने आई थी। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी खुद आईपैक निदेशक के घर और फिर सेक्टर पांच स्थित कार्यालय पहुंचीं। वहां उनके अधिकारी कई फाईल लेकर चले गए। यह घटना बंगाल में राजनीति और शासन के ''खतरनाक घालमेल'' का उदाहरण है।

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