कोलकाता , मार्च 23 -- चुनाव आयोग की ओर से जारी पश्चिम बंगाल के मतदाताओं की पहली पूरक सूची से 12 लाख नाम हटा दिए गए हैं।

चुनाव आयोग के सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी।

राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक सोमवार आधी रात से कुछ पहले जारी की गई इस सूची में जांच के दायरे में आए करीब 32 लाख मतदाताओं के नामों पर फैसला कर दिया गया।

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद 28 फरवरी को जारी पहली अंतिम सूची के मुताबिक राज्य में मतदाताओं की कुल संख्या 7,04,59,284 थी। इनमें से 60,06,675 मतदाताओं को 'जांच के दायरे में'वाली सूची में रखा गया था।

उन्होंने बताया कि दूसरी पूरक सूची शुक्रवार को जारी होने वाली है, लेकिन आयोग ने कलकत्ता उच्च न्यायालय से हर दिन अपडेटेड आंकड़ों के साथ एक पूरक सूची जारी करने की इजाजत मांगी है।

जब दो दिन पहले पहली सूची जारी की गई थी, तो चुनाव आयोग ने यह नहीं बताया था कि इस चरण में कितने नामों पर फ़ैसला हुआ है, और न ही यह बताया था कि कितने मतदाताओं को सूची से बाहर किया गया है।

पश्चिम बंगाल में एसआईआर एक बहुत बड़ा काम रहा है। एसआईआर शुरू होने से पहले राज्य में मतदाताओं की कुल संख्या 7,66,37,529 थी। मतदाता सूची के के ड्राफ् में 58,20,899 नाम हटा दिए गए थे, जिससे ड्राफ्ट सूची में मतदाताओं की कुल संख्या 7,08,16,630 रह गई थी। गत 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची का पहला चरण जारी किया गया था, जिसमें 5,46,053 और नाम हटा दिए गए थे। इस तरह, उस तारीख तक हटाए गए नामों की कुल संख्या 63,66,952 हो गई थी।

ड्राफ्ट सूची में शामिल 7,08,16,630 मतदाताओं में से करीब 1.52 करोड़ मतदाताओं के नामों पर सुनवाई होनी थी। इनमें से 3,168,426 मतदाताओं को "नो-मैपिंग" मतदाता के तौर पर वर्गीकृत किया गया, क्योंकि वे 2002 में किए गए पिछले एसआईआर के साथ अपना जुड़ाव साबित नहीं कर पाए। बाकी 1.42 करोड़ मतदाताओं को उनके रिकॉर्ड में पाई गई तार्किक विसंगतियों के कारण सुनवाई के लिए बुलाया गया। सुनवाई के लिए बुलाए गए 1.42 करोड़ मतदाताओं में से आयोग ने 82 लाख मामलों में चुनावी पंजीकरण अधिकारियों और सहायक चुनावी पंजीकरण अधिकारियों की राय से सहमति जताई। जांच-पड़ताल के बाद सुनवाई के उपरांत पांच लाख से अधिक नाम हटा दिए गए, जिसके बाद अंतिम मतदाता सूची के पहले चरण का प्रकाशन किया गया।

शीर्ष न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए इन मतदाताओं का सत्यापन कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की ओर से नियुक्त न्यायिक अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है। वर्तमान में पूरे राज्य में इन लंबित मामलों को निपटाने में 705 न्यायिक अधिकारी लगे हुए हैं।

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