कोलकाता , दिसंबर 09 -- चुनाव आयोग ने मंगलवार को कड़ी चेतावनी जारी की है कि पश्चिम बंगाल में चल रहे चुनावी सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान सरकारी दस्तावेज़ों या पहचान पत्रों में हेराफेरी करने की किसी भी कोशिश पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय ने एक लिखित बयान में कहा कि अपराधियों को कानून के तहत सज़ा मिलेगी, जिसमें जेल और जुर्माना शामिल है।

आयोग के अनुसार, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 337 में मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड, जन्म, विवाह या मृत्यु प्रमाण पत्र, अदालती रिकॉर्ड, सरकारी कार्यालय के दस्तावेज़, सरकारी कर्मचारियों द्वारा जारी प्रमाण पत्र, या पावर ऑफ अटॉर्नी जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों में हेराफेरी करने पर सात साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।

सीईओ कार्यालय ने यह साफ कर दिया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान किए गए ऐसे किसी भी अपराध पर उसी स्तर की सज़ा मिलेगी। राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी, भाजपा ने एसआईआर अभियान को लेकर बार-बार चिंता जताई है और आरोप लगाया है कि अवैध अप्रवासी और फर्जी मतदाता अभी भी सूची में बने हुए हैं।

ऐसे दावे सामने आए हैं कि कुछ लोग फर्जी पहचान पत्र बनाते हैं या वोटर कार्ड पाने के लिए गैर-संबंधित व्यक्तियों को माता-पिता के रूप में सूचीबद्ध करते हैं। ऐसे उल्लंघनों को रोकने के लिए, आयोग ने पहले ही विसंगतियों की पहचान करने के लिए नामों और तस्वीरों सहित मतदाता विवरणों को स्कैन करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करना शुरू कर दिया है।

अधिकारियों का कहना है कि यह प्रणाली फर्जी दस्तावेज़ों के साथ-साथ प्रतिरूपण और घुसपैठ की कोशिशों का पता लगाने में मदद करेगी। इस बीच, आयोग की वेबसाइट पर गणना फॉर्म अपलोड करने की समय सीमा दो दिनों में समाप्त हो जाएगी।

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