कोलकाता , नवंबर 06 -- चुनाव आयोग (ईसीआई) ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान रिपोर्ट की गई अनियमितता की शिकायतों को लेकर सख्त कार्रवाई करने का फैसला किया है, जबकि एसआईआर के लिए राज्य भर में 1.10 करोड़ से अधिक गणना फॉर्म पहले ही वितरित किए जा चुके हैं।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, यह फैसला उन रिपोर्टों के मद्देनजर लिया गया है, जिनमें कुछ बूथ-स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) ईसीआई के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हुए रिश्तेदारों और राजनीतिक सहयोगियों सहित तीसरे पक्ष को अपनी ओर से फॉर्म वितरित करने की अनुमति देने की बात कही गयी है। ऐसा ही एक मामला पश्चिम मिदनापुर जिले के दासपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत बीएलओ रितुपर्णा हाजरा से जुड़ा था, जिनके पति असीम हाजरा कथित तौर पर उनकी जगह फॉर्म वितरित कर रहे थे। गौरतलब है कि श्री हाजरा तृणमूल कांग्रेस के एक सक्रिय नेता हैं।

सीईओ कार्यालय के सूत्र ने कहा, "संबंधित बीएलओ को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और उनके जवाब के आधार पर आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।" उन्होंने बताया कि अन्य क्षेत्रों से भी ऐसी ही शिकायतें सामने आई हैं, जिससे सीईओ कार्यालय को जांच शुरू करने के लिए प्रेरित होना पड़ा है। अधिकारियों ने बीएलओ को निर्धारित स्थानों पर बैठने और मतदाताओं से फॉर्म लेने के लिए कहने के खिलाफ भी चेतावनी जारी की है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "सभी बीएलओ को ईसीआई के मानदंडों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है।"इस बीच, चार नवंबर को शुरू हुए एसआईआर अभियान ने काफी प्रगति कर ली है। बुधवार रात (पांच नवंबर) आठ बजे तक सभी 294 विधानसभा क्षेत्रों में तैनात 80,681 बीएलओ द्वारा पूरे बंगाल में 1.10 करोड़ से अधिक फॉर्म वितरित किए गए।

चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने कहा, "अब तक प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है और राज्य के किसी भी हिस्से से किसी बड़ी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है। अगर किसी भी तरह के प्रतिरोध या असहयोग की सूचना मिलती है, तो संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) को तुरंत मामले की जाँच करने के लिए कहा जाता है।" अधिकारियों के अनुसार, इस प्रक्रिया के लिए लगभग 7.66 करोड़ गणना प्रपत्र तैयार किए गए हैं, जिनकी प्रत्येक मतदाता को दो प्रतियाँ दी गई हैं। बीएलओ को दोनों पर प्रतिहस्ताक्षर करने होंगे। इनमें से एक आयोग के लिए रखा जाएगा और दूसरा मतदाता को रिकॉर्ड के लिए मुहर लगी पावती के साथ लौटाया जाएगा। पश्चिम बंगाल में एसआईआर 23 वर्षों के अंतराल के बाद किया जा रहा है। इससे पहले राज्य में एसआईआर 2002 में किया गया था।

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