सिलीगुड़ी , अप्रैल 02 -- पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सात जजों को देर रात तक कथित तौर पर बंधक बनाये रखने की घटना के लिए कांग्रेस नेताओं के एक वर्ग को दोषी ठहराया है।
उन्होंने गुरुवार को मालदा के बैष्णवनगर में तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार चंदना सरकार के समर्थन में चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस, भाजपा और अन्य विपक्षी दलों पर हमले तेज करते हुए यह बात कही।
सुश्री बनर्जी ने अपने संबोधन में उन सात जजों को देर रात तक कथित तौर पर बंधक बनाये रखने की घटना के लिए कांग्रेस नेताओं के एक वर्ग को दोषी ठहराते हुए इसे बंगाल को बदनाम करने के उद्देश्य से की गयी 'नियोजित उकसावेबाजी' करार दिया। उन्होंने कहा कि इस घटना ने राज्य के लिए गंभीर शर्मिंदगी पैदा की है और उसकी छवि को नुकसान पहुंचाया है।
उन्होंने कहा, "मैं बहुत आहत हूँ। इस एक घटना की वजह से बंगाल का अपमान हुआ है।"मुख्यमंत्री ने इस घटना की आलोचना करने के साथ-साथ मतदाता सूची से नाम हटाये जाने को लेकर जनता में व्याप्त नाराजगी को भी स्वीकार किया और इस गुस्से को 'स्वाभाविक' बताया। उन्होंने हालांकि लोगों से संयम बरतने का आग्रह किया और अपील की कि वे विरोध प्रदर्शन के बजाय कानूनी उपायों का सहारा लें।
उन्होंने कहा, "उच्चतम न्यायालय ने साफ कर दिया है कि उचित आवेदन के माध्यम से नाम फिर से जोड़े जा सकते हैं। न्यायाधीशों पर हमला न करें और कानून को अपने हाथ में न लें।" उन्होंने प्रभावित लोगों को समाधान के लिए न्यायाधिकरण जाने की सलाह दी।
सुश्री बनर्जी ने इस मुद्दे को सुलझाने में अपनी सरकार की भूमिका पर जोर देते हुए दावा किया कि उनके आंदोलन और उसके बाद कानूनी हस्तक्षेप के कारण लगभग 22 लाख नाम बहाल किये गये हैं। उन्होंने कहा, "मैं पांच दिनों तक सड़कों पर रही और फिर उच्चतम न्यायालय गयी। यही वजह है कि ये नाम वापस जुड़ पाये हैं।"कांग्रेस पर निशाना साधते हुए तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने आरोप लगाया, "उसके नेता पूरे साल निष्क्रिय रहते हैं और केवल चुनावों के दौरान उकसावे की राजनीति करते हैं।" उन्होंने कांग्रेस पर वोटों के ध्रुवीकरण और धनबल के जरिये मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, "वे वोट बांटते हैं और उन्हें खरीदने की कोशिश भी करते हैं।" इसके साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि अगर केंद्रीय एजेंसियां न्यायाधीशों वाली घटना में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करती हैं तो क्या कांग्रेस उनके साथ खड़ी होगी।
उन्होंने कहा, "अगर कांग्रेस मजबूत होती तो दिल्ली में भाजपा सत्ता में नहीं आती।" भाजपा पर हमला बोलते हुए सुश्री बनर्जी ने पार्टी को 'बंगाल विरोधी' बताया और आरोप लगाया कि वह 'एसआईआर' प्रक्रिया के माध्यम से मतदाता सूची में हेरफेर कर राज्य पर कब्जा करने की साजिश रच रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि असली मतदाताओं के नाम हटाये जा रहे हैं, जबकि अन्य राज्यों के लोगों के नाम शामिल किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा, "वे आपके लोकतांत्रिक अधिकार - आपके वोट देने के अधिकार और आपकी नागरिकता को छीनना चाहते हैं।"मुख्यमंत्री ने आगे आरोप लगाया कि चुनावों से पहले मतदाताओं को डराने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने आगाह करते हुए कहा, "घर-घर छापेमारी की जा रही है। किसी भी उकसावे में न आयें। आपको परेशान करने के लिए एनआईए जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा सकता है।"केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि कोयला और तस्करी रैकेट में कथित तौर पर शामिल लोगों को पहले गिरफ्तार किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर राज्य की कानून-व्यवस्था में हस्तक्षेप करने की अनुमति देने का भी आरोप लगाया।
इस तीखी राजनीतिक बयानबाजी के बीच सुश्री बनर्जी ने बार-बार शांति और सांप्रदायिक सौहार्द की अपील की। उन्होंने धर्मों के बीच एकता बनाये रखने का आग्रह करते हुए कहा, "उकसावे में न आएं। न्यायाधीशों पर हमला न करें। बंगाल में अमन कायम रखें। मैं सभी धर्मों में विश्वास रखती हूं। हाथ की पांच उंगलियों की तरह, सभी धर्मों के लोगों को एकजुट रहना चाहिए।"ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन का नाम लिए बिना मुख्यमंत्री ने 'हैदराबाद से आने वाले' नेताओं की भी आलोचना की और उन पर अल्पसंख्यक वोटों को बांटने की कोशिश करने का आरोप लगाया। असदुद्दीन ओवैसी का परोक्ष संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि इसी तरह की रणनीतियां बिहार में इस्तेमाल की गयी थीं और अब उन्हें बंगाल में दोहराया जा रहा है।
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