कोलकाता , अप्रैल 02 -- पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए बागदा सीट से केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर की पत्नी को उम्मीदवार बनाए जाने के खिलाफ भाजपा के एक वर्ग के कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने केंद्रीय पोत परिवहन राज्य मंत्री एवं बोंगांव सांसद शांतनु ठाकुर की पत्नी सोमा ठाकुर को बागदा विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया है। यह क्षेत्र मतुआ समुदाय के प्रभाव वाला है, जो अनुसूचित जाति के हिंदुओं का एक प्रभावशाली समूह है और 1947 के विभाजन के बाद पूर्वी पाकिस्तान (अब बंगलादेश) से यहां आकर बसा था।

उम्मीदवारी की घोषणा के बाद स्थानीय कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है। उनका आरोप है कि क्षेत्र पर एक "बाहरी" उम्मीदवार थोपा गया है। आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने "हम बाहरी उम्मीदवार को स्वीकार नहीं करेंगे" जैसे नारे लगाते हुए दोपहर में हेलेन्चा बाजार में विरोध रैली निकाली। प्रदर्शनकारियों ने शांतनु ठाकुर के खिलाफ भी नारेबाजी करते हुए पार्टी से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की।

स्थानीय भाजपा नेता दुलाल बार भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल दिखे। आंदोलन अब संगठित रूप ले चुका है और प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि पार्टी क्षेत्र से "स्थानीय बेटे या बेटी" को उम्मीदवार नहीं बनाती है तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

संगठन के भीतर सुलग रही असंतोष की भावना अब सड़कों पर दिखाई देने लगी है, जिससे जमीनी स्तर पर गहरी नाराजगी का संकेत मिलता है। सूत्रों के अनुसार सोमा ठाकुर को अपने प्रारंभिक चुनाव प्रचार के दौरान ही विरोध का आभास हो गया था। एक वरिष्ठ स्थानीय भाजपा नेता से आशीर्वाद लेने के दौरान उन्हें कथित तौर पर असहमति का सामना करना पड़ा।

दिलचस्प रूप से बागदा सीट पर मुकाबला "पारिवारिक टकराव" का रूप लेता दिख रहा है। तृणमूल कांग्रेस ने यहां ममता ठाकुर की बेटी मधुपर्णा ठाकुर को उम्मीदवार बनाया है, जो ठाकुरनगर के उसी प्रभावशाली मतुआ परिवार से संबंध रखती हैं। इससे यह सीट रिश्तेदारों के बीच हाई-प्रोफाइल मुकाबले में बदल गई है, जिस पर पूरे राज्य की नजर है।

बागदा में असंतोष कोई अकेली घटना नहीं है। राज्य के अन्य हिस्सों में भी भाजपा और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस द्वारा उम्मीदवारों की घोषणा के बाद विरोध देखने को मिला है।

अलीपुरद्वार में भाजपा कार्यकर्ताओं ने परितोष दास की उम्मीदवारी का विरोध किया, जबकि हरिणघाटा में कार्यकर्ताओं ने संगठनात्मक कमजोरी का हवाला देते हुए उम्मीदवार बदलने की मांग की।

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