कोलकाता , अप्रैल 20 -- पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 152 विधानसभा क्षेत्रों में से कम से कम 16 सीटों पर महिला मतदाताओं की संख्या पुरुष मतदाताओं से ज्यादा है।

यह जानकारी चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों से मिली है। ये सीटें दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार और मुर्शिदाबाद में फैली हुई हैं। आंकड़ों के अनुसार कुल 3,60,77,171 मतदाताओं में 1,84,99,496 पुरुष, 1,75,77,210 महिलाएँ और 465 ट्रांसजेंडर मतदाता हैं।

पहले चरण में महिला मतदाताओं के पक्ष में सबसे ज़्यादा झुकाव मुर्शिदाबाद ज़िले के समसेरगंज में देखा गया, जहाँ 78,004 पुरुष मतदाताओं के मुकाबले 83,430 महिलाएँ हैं, जिससे पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की संख्या में 5,426 ज़्यादा का बड़ा अंतर है। दूसरी तरफ, सबसे कम अंतर दार्जिलिंग ज़िले के सिलीगुड़ी में देखा गया, जहाँ 99,920 पुरुष मतदाताओं के मुकाबले 1,00,844 महिला मतदाता हैं। यहां सिर्फ़ 924 मतदाताओं का मामूली अंतर है।

आंकड़ों के अनुसर जिन चुनाव क्षेत्रों में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुष मतदाताओं से ज़्यादा है, उनमें उत्तर बंगाल और आस-पास के कई इलाके शामिल हैं, जिनमें कालचीनी (एसटी) शामिल है, जहाँ महिला मतदाताओं (1,11,742) की संख्या पुरुष मतदाताओं (1,09,713) से ज़्यादा है, और मदारीहाट (एसटी) में, जहाँ 96,262 पुरुष मतदाताओं के मुकाबले 97,695 महिला मतदाता हैं। इसी तरह, नागराकाटा (एसटी) में 1,12,292 महिला मतदाता हैं, जबकि 1,07,824 पुरुष मतदाता हैं।

दार्जिलिंग जिले में दार्जिलिंग, कुर्सियांग, माटीगारा-नक्सलबाड़ी (एससी) और सिलीगुड़ी जैसे विधानसभा क्षेत्रों में महिला मतदाताओं की संख्या ज़्यादा है। आयोग के आंकड़ों से पता चलता है कि दार्जिलिंग में 1,04,681 महिला मतदाता हैं, जबकि 1,03,033 पुरुष मतदाता हैं, जबकि कुर्सियांग में 1,10,135 महिला मतदाता हैं, जबकि 1,06,014 पुरुष मतदाता हैं। माटीगारा-नक्सलबाड़ी में अंतर कम है, लेकिन फिर भी महत्वपूर्ण है, जहाँ 1,34,906 महिला मतदाता हैं, जो 1,33,571 पुरुषों से ज़्यादा हैं।

आंकड़ों के अनुसार हालांकि ऐसे निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या कुल 152 मतदान केंद्रों की तुलना में सीमित है, लेकिन उनके राजनीतिक महत्व को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक ये चुनाव क्षेत्र अहम भूमिका निभा सकते हैें, खासकर इसलिए क्योंकि राजनीतिक दल कल्याणकारी योजना और संदेशों के ज़रिए महिला मतदाताओं को लुभाने के लिए अपने अभियान को तेज़ी से बदल रहे हैं। हालांकि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान काफी नाम हटाए गए हैं, लेकिन रूझान बताता है कि पुरुषों के नाम हटाने की संख्या थोड़ी ज़्यादा है।

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