कोलकाता , दिसंबर 08 -- पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध लोक नाटक जात्रा पाला पर बनी अर्घ्य मुखर्जी की नयी वृतचित्र 'जात्रा पाला: द इकोज़ ऑफ़ ऐन ओपन स्टेज' दिखाती है कि सदियों पुरानी यह कला आधुनिक मनोरंजन के बीच भी कैसे जीवित है और आगे बढ़ रही है।
फिल्म में दिग्गज कलाकार काकोली चौधरी और अनल चक्रवर्ती महत्वपूर्ण भूमिका में हैं। फिल्म के जरिए जात्रा के समृद्ध इतिहास और इसके पुनर्जीवन की झलक मिलती है।
फिल्म के निर्देशक अर्घ्य मुखर्जी ने यूनीवार्ता से बातचीत में कहा, "मेरे बचपन में जात्रा मेरे लिए एक तरह का विरोधाभास था। यह तेज़ था, लेकिन सुंदर भी और फिल्मों या ओटीटी से बहुत पहले हमारी इतिहास परंपरा को आगे बढ़ाता था।"श्री मुखर्जी ने कहा कि उन्हें लगा था कि वह एक पुरानी होती जा रही कला के आखिरी दौर को कैमरे में कैद करेंगे। लेकिन हुगली, बर्धमान, पुरुलिया और बांकुरा की यात्राओं में उन्हें एक जीवंत और बदलती हुई दुनिया मिली। युवा कलाकार परंपरा को बनाए रखते हुए इसमें नई कल्पनाओं को जोड़ रहे थे। उन्होंने बताया कि फिल्म बनाने में कई चुनौतियाँ भी आईं। कुछ शहरी लोगों ने जात्रा को पुराना और कमतर समझकर उन्हें हतोत्साहित किया। लेकिन, सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविज़न इंस्टीट्यूट (एसआरएफटीआई) का सहयोग मिले और वहाँ से परियोजना के लिए 30,000 रुपये की स्वीकृति मिली , हालांकि असली खर्च करीब एक लाख रुपये तक पहुंच गया।
श्री मुखर्जी ने कहा, "यह मेरे जीवन के सबसे समृद्ध अनुभवों में से एक था। ग्रामीण बंगाल की यात्रा ने मुझे सिखाया कि संस्कृति को सच में समझना है, तो शहर से बाहर निकलना पड़ता है।" उन्होंने अपनी इन यात्राओं को याद करते हुए बताया कि जात्रा के शो देर रात शुरू होते हैं और बिना बताए पहुँचने पर भी गाँव वालों ने टीम का खाना, ठहरने की जगह और ढेरों कहानियों के साथ स्वागत किया।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित