चेन्नई , फरवरी 27 -- बंगाल की खाड़ी (बीओबी) क्षेत्र में मत्स्य शासन व्यवस्था में व्यापक और सकारात्मक बदलाव की दिशा में अहम पहल की जा रही है। क्षेत्रीय देशों ने लघु मत्स्य (स्मॉल-स्केल फिशरीज) क्षेत्र के लिये राष्ट्रीय स्वामित्व वाले राष्ट्रीय कार्ययोजना तैयार करने की प्रतिबद्धता जतायी है।
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) द्वारा रेक्जाविक, आइसलैंड में आयोजित मत्स्य प्रबंधन पर उपसमिति (सीओएफआई-एफएम) की चार दिवसीय वैश्विक बैठक में बंगाल की खाड़ी कार्यक्रम अंतर-सरकारी संगठन (बीओबीपी-आईजीओ) ने एक रोडमैप पेश किया। इसमें (एफएओ) और क्षेत्रीय सहयोग के जरिये भारत, बांग्लादेश, मालदीव और श्रीलंका में लघु मत्स्य क्षेत्र को सशक्त बनाने की रणनीति पेश की गयी।
भारत में 40 लाख से अधिक समुद्री मछुआरे और लाखों अंतर्देशीय मत्स्यकर्मी हैं। ऐसे में समावेशी शासन, सामाजिक सुरक्षा और व्यावहारिक प्रबंधन उपकरणों पर जोर का सीधा असर आगामी राष्ट्रीय नीतियों और कार्यक्रमों पर पड़ने की उम्मीद है।
बीओबीपी-आईजीओ के निदेशक डॉ. पी. कृष्णन ने बताया कि क्षेत्र के मछली पकड़ने वाले बेड़े का बड़ा हिस्सा अपनी जीवन-चक्र की अंतिम अवस्था में है और उनके तत्काल प्रतिस्थापन तथा सतत निपटारे की आवश्यकता है।
उन्होंने पुराने जहाजों को चरणबद्ध तरीके से हटाने, चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और सुरक्षित एवं टिकाऊ नौका सामग्री अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। रोडमैप में समुद्री सुरक्षा, गरिमापूर्ण कार्य, बीमा और आजीविका सहयोग जैसे सामाजिक पहलुओं पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है। मत्स्य मूल्य श्रृंखला में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है।
इसके अलावा, वैज्ञानिक आंकड़ों को सरल नियमों और दिशा-निर्देशों के जरिये व्यावहारिक प्रबंधन में बदलने की बात कही गई, ताकि राष्ट्रीय एजेंसियां स्टॉक आकलन से लेकर कार्यान्वयन तक तेजी से कदम उठा सकें।
बीओबीपी-आईजीओ ने साझा और अंतर-सीमाई मछली भंडार के संयुक्त आकलन तथा समन्वित प्रबंधन के जरिए क्षेत्रीय सहयोग मजबूत करने की आवश्यकता भी रेखांकित की। इससे दीर्घकालिक मछली उपलब्धता बढ़ाने और अतिदोहन कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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