कोलकाता , दिसंबर 11 -- प्रवर्तन निदेशालय के कोलकाता क्षेत्रीय कार्यालय ने पीके एंटरप्राइजेज के मालिक प्रसेनजीत दास और पांच अन्य लोगों के खिलाफ शहर की एक विशेष अदालत में धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के अंतर्गत आरोप पत्र दायर किया है। यह मामला उनके दिवंगत पिता, के.पी.एस. एंटरप्राइज के मालिक पूर्णेंदु दास से जुड़े एक कथित बैंक धोखाधड़ी से संबंधित है।
इस सप्ताह दायर किए गए आरोपपत्र के अनुसार, ईडी ने आरोप लगाया है कि प्रसेनजीत दास, चंदन सरकार, ललतू साहा और तीन अन्य लोगों ने दिवंगत पूर्णेंदु दास के साथ मिलकर धोखाधड़ी वाले निर्यात लेनदेन और बंगलादेश को प्याज निर्यात करने के लिए आवंटित बैंक ऋण सुविधाओं का दुरुपयोग कर एक राष्ट्रीयकृत बैंक को धोखा देने की साजिश रची।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), 1860 की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत दर्ज एफआईआर के बाद ईडी ने अपनी जांच शुरू की। सीबीआई को जांच में पता चला कि दिवंगत पूर्णेंदु दास ने अपनी स्वामित्व वाली कंपनी के.पी.एस. एंटरप्राइज के माध्यम से तत्कालीन इलाहाबाद बैंक (अब इंडियन बैंक) से बंगलादेश को प्याज निर्यात करने के लिए आठ करोड़ रुपये की पैकिंग क्रेडिट सुविधा और 25 करोड़ रुपये की 'विदेशी बिल नेगोशिएशन' सुविधा का लाभ उठाया।
जांच में पता चला कि कंपनी द्वारा प्रस्तुत निर्यात दस्तावेज और बिल जाली थे, जिसके कारण जाली निर्यात बिल जमा करने से बैंक को 26.72 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। ईडी की जांच में पता चला कि बंगलादेश के विभिन्न बैंकों में खोले गए और इलाहाबाद बैंक द्वारा के.पी.एस. एंटरप्राइज के लिए जारी किए गए लेटर ऑफ क्रेडिट के अंतर्गत कुल 25 करोड़ रुपये के साइट बिल बकाया हो गया। जब इलाहाबाद बैंक ने निर्यात बिलों के भुगतान की मांग की तो बंगलादेश के लेटर ऑफ क्रेडिट खोलने वाले बैंकों ने माल की प्राप्ति न होने का हवाला देते हुए भुगतान करने से मना कर दिया।
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