(जयंत रॉय चौधरी से )नई दिल्ली , दिसंबर 31 -- बंगलादेश के पूर्व विदेश मंत्री प्रोफेसर ए के अब्दुल मोमेन ने आगाह किया है कि यदि बंगलादेश पाकिस्तान और चीन के साथ अत्यधिक नजदीकी बढ़ाता है और धार्मिक कट्टरवाद पनपने देता है तो देश एक खतरनाक भू-राजनीतिक और वैचारिक भंवर में फंस सकता है। उन्होंने ऐसी स्थिति में देश में आर्थिक गतिविधियों में ठहराव, कूटनीतिक अलगाव और सामाजिक विभाजन की भी गंभीर आशंका जतायी है।

वर्ष 2019 से 2024 तक बांग्लादेश के विदेश मंत्री रहे प्रो. मोमेन ने यूनीवार्ता को दिए विशेष साक्षात्कार में कहा कि बंगलादेश-पाकिस्तान-चीन का उभरता गठजोड़ न केवल ढाका के लिए बल्कि समूचे दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में गहरी अस्थिरता पैदा कर सकता है। उन्होंने कहा कि इस गठजोड़ के कारण कई तरह की परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं जिनमें अमेरिका की ओर से दबाव या प्रतिबंध, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विश्वसनीयता में गिरावट, भारत और अन्य उदार पड़ोसी देशों से दूरी, और सबसे गंभीर रूप से जिहादी कट्टरवाद तथा अधिनायकवादी शासन की ओर बढना शामिल है।

इससे पहले बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन ने इसी महीने कहा था कि 'रणनीतिक रूप' से यह संभव है कि बंगलादेश पाकिस्तान के साथ किसी ऐसे क्षेत्रीय समूह में शामिल हो सकता है जिसमें भारत न हो। यह सर्वविदित है कि दिवंगत प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के शासनकाल के दौरान बंगलादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के चीन और पाकिस्तान दोनों से करीबी संबंध थे और उन्होंने उस समय पाकिस्तान की खुफिा एजेन्सी आईएसआई को भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र को अस्थिर करने के उद्देश्य से आतंकी शिविर चलाने की अनुमति दी थी।

प्रो. मोमेन ने कहा कि बांग्लादेश की पहचान दांव पर लगी है जो 1971 में रक्त रंजित मुक्ति संग्राम के बाद अस्तित्व में आया, जिसकी नींव धर्मनिरपेक्ष राष्ट्रवाद और भाषाई गौरव पर रखी गई थी। यह देश उन परिस्थितियों का सामना कर सकता है जहां उसे एक ऐसे जिहादी देश के रूप में ढाला जा सकता है जहां महिलाओं को द्वितीय श्रेणी का नागरिक बना दिया जाए और लोकतांत्रिक संस्थाओं को खोखला कर दिया जाए।

उन्होंने यूनीवार्ता से कहा कि बांग्लादेश-पाकिस्तान-चीन गठजोड़ की प्रकृति के आधार पर यह हो सकता है कि ढाका को भारत के प्रति शत्रुतापूर्ण रुख अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए, जिसके गंभीर नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं, जिनमें सीमा पर संघर्ष और घुसपैठ तक शामिल हैं। साथ ही चीन पर निर्भरता और निकटता के आधार पर अमेरिका की ओर से बढ़ते दबाव या प्रतिबंध झेलने पड़ सकते हैं, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी स्वीकार्यता कम हो सकती है, और देश एक ऐसे जिहादी राष्ट्र में बदल सकता है जहां महिलाओं को द्वितीय श्रेणी का नागरिक माना जाएगा।

प्रोफेसर मोमेन की यह चेतावनी सुश्री शेख हसीना के सत्ता से अपदस्थ किये जाने के बाद बांग्लादेश की राजनीतिक दिशा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आयी है। सुश्री हसीना ने दो दशकों से अधिक समय तक देश की राजनीति पर वर्चस्व बनाए रखा था। उन्होंने कहा कि सुश्री हसीना भले ही आलोचकों के प्रति असहिष्णु रही हों लेकिन वह अस्थिर राजनीतिक परिदृश्य में एक दुर्लभ स्थिरता का प्रतीक थीं। वह एक धर्मनिरपेक्ष, गैर-सांप्रदायिक नेता थीं, जिन्होंने धार्मिक और जातीय भेदभाव से ऊपर उठकर आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि शेख हसीना के बाद के दौर में कट्टरपंथियों और जिहादियों के उभरने की पूरी संभावना है।

उन्होंने चेतावनी दी कि इससे मानवीय मूल्यों पर आधारित राष्ट्रीय चेतना नष्ट हो जाएगी और धर्म या आस्था के आधार पर समाज का विखंडन होगा। उन्होंने हाल की कई बर्बर हत्याओं का उल्लेख किया, जिनमें एक श्रमिक दीपू दास को सार्वजनिक रूप से प्रताड़ित कर जलाने की घटना और भीड़ द्वारा एक व्यक्ति की दिनदहाड़े पत्थर मारकर हत्या शामिल है।

प्रो. मोमेन ने चेतावनी दी कि बंगलादेश में बढ़ता सांप्रदायिक रुझान भारत पर भी प्रभाव डाल सकता है जिससे वहां मुस्लिम अल्पसंख्यकों पर दबाव बढ़ेगा और क्षेत्रीय स्तर पर अविश्वास गहरा होगा। उन्होंने कहा कि जिहादी कट्टरपंथी सामाजिक और राजनीतिक स्थिरता के लिए एक वास्तविक खतरा हैं, न केवल बांग्लादेश में बल्कि उससे बाहर भी।

इस निराशाजनक परिदृश्य के विपरीत, प्रोफेसर मोमेन ने सुश्री शेख हसीना के शासनकाल को एक स्वर्णिम दौर बताया। उनके अनुसार 21 वर्षों के शासन में बंगलादेश कमजोर अर्थव्यवस्था से निकलकर तेजी से बढ़ते विकासशील देशों की श्रेणी में शामिल हो गया । इस दौरान उसे संयुक्त राष्ट्र जैसे संस्थानों से सराहना मिली। सुश्री हसीना के नेतृत्व में 2009 से 2024 के बीच बांग्लादेश ने औसतन 6.6 प्रतिशत वार्षिक विकास दर बनाए रखी, जो पिछले दशकों की तुलना में दोगुनी से भी अधिक थी। गरीबी में उल्लेखनीय गिरावट आयी, जो 2009 के 42 प्रतिशत से घटकर 2023 में 17 प्रतिशत रह गयी, जबकि अर्थव्यवस्था का आकार 1990 के दशक के मध्य में 90 अरब डॉलर से बढ़कर लगभग 480 अरब डॉलर हो गया।

प्रोफेसर मोमेन ने कहा कि उनकी सरकार में तेज आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण पर समान रूप से जोर दिया गया। सरकार ने बिजली आपूर्ति, व्यापक स्कूल नामांकन, कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी, डिजिटल कौशल और बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे को बढ़ावा दिया। साथ ही बुजुर्गों, विधवाओं, छात्रों और सबसे गरीब परिवारों के लिए व्यापक सामाजिक सुरक्षा योजनाएं भी लागू की गयी।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित