ढाका , नवम्बर 17 -- बंगलादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश के 'अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण' ने पिछले वर्ष जुलाई में हुए व्यापक विद्रोह के दौरान 'मानवता के विरुद्ध अपराधों' के आरोप में मौत की सजा सुनायी है।

न्यायाधिकरण ने सोमवार को यह फैसला कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सुनाया। उसने पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी मृत्युदंड की सजा सुनायी है और पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून को पाँच वर्ष की सजा मुकर्रर की है। श्री मामून अपना अपराध स्वीकार करके सरकारी गवाह बन गये थे। न्यायाधिकरण ने श्रीमती हसीना और असदुज्जमां की संपत्तियों को जब्त करने का भी आदेश दिया है।

श्रीमती हसीना पर न्यायाधिकरण में मुकदमा उनकी अनुपस्थिति में चलाया गया। वह इन दिनों भारत में रह रही हैं जबकि असदुज्जमां के बारे में कोई जानकारी नहीं हैं और मामून हिरासत में हैं।

फैसला सामने आने के बाद श्रीमती हसीना ने सभी आरोपों से इनकार किया और फैसले को "पक्षपातपूर्ण और राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित" बताया है। उन्होंने कहा कि उचित अदालत में, सुबूत निष्पक्ष रूप से परखे जायें तो वह उन पर आरोप लगाने वालों का सामना करने से नहीं डरतीं। इस बीच फैसला आने के तुरंत बाद देश में कुछ स्थानों पर हिंसा की घटनाएं हुई हैं।

कुल 453 पन्ने वाले फैसले के अनुसार, श्रीमती हसीना (78) को दो मामलों में मृत्युदंड दिया गया है। इसमें पहला मामला ढाका के चंखरपुल क्षेत्र में छह निहत्थे प्रदर्शनकारियों की गोली मारकर हत्या का है, और दूसरा मामला अशुलिया में छात्र प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने से संबंधित है, जिसमें पाँच छात्रों को हत्या के बाद और एक छात्र को जीवित रहते हुए जला दिया गया था। इसके अलावा भी दूसरे कई मामलों में उनको दोषी ठहराते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनायी गयी है।

न्यायाधिकरण के तीन न्यायाधीशों की पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि सुश्री हसीना ने 2024 में बंगलादेश में कई सप्ताह की अशांति के दौरान क़ानून प्रवर्तन एजेंसियों को सैकड़ों हत्याओं के लिए उकसाया। इस दौरान लगभग 1,400 प्रदर्शनकारी मारे गए और 25,000 तक घायल हुए। सुश्री हसीना पर पाँच आरोप लगाये गये थे, जिनमें हत्या के लिए उकसाना, फाँसी का आदेश देना और विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए घातक हथियारों, ड्रोन और हेलीकॉप्टरों के इस्तेमाल को अधिकृत करना शामिल है।

फैसला सुनाये जाने के समय किसी हिंसा की आशंका के मद्देनजर अदालत परिसर के चारों ओर सेना, बॉर्डर गार्ड बंगलादेश, रैपिड एक्शन बटालियन, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बटालियन का चार-स्तरीय सुरक्षा घेरा तैनात किया गया था।

मामले में अभियोजन पक्ष ने कुल 135 पृष्ठों का आरोपपत्र दाखिल किया था। इमसें 81 गवाहों की सूची में से 54 गवाहों ने न्यायालय में बयान दिया। इन गवाहों में पूर्व पुलिस महानिरीक्षक मामून और दूसरे जाँच अधिकारी भी शामिल थे।

अभियोजन पक्ष ने हत्या, हत्या के प्रयास, यातना और अन्य अमानवीय कृत्यों से संबंधित आरोपों के आधार पर मृत्युदंड की मांग की थी। अभियोजकों ने यह भी अनुरोध किया था कि दोषी पाए जाने पर आरोपियों की सभी संपत्तियाँ जब्त कर पीड़ित परिवारों को दी जाएं। हालाँकि, बचाव पक्ष ने सुश्री हसीना की बरी होने की उम्मीद जताई थी। सुश्री हसीना की कानूनी टीम ने 'निष्पक्ष सुनवाई के अधिकारों और उचित प्रक्रिया के अभाव' का हवाला देते हुए, मनमाने ढंग से की गयी सुनवाई बताया है।

यह फैसला न्यायाधिकरण की तीन सदस्यीय न्यायिक पीठ ने सुनाया। इसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति मोहम्मद गुलाम मुर्तुजा मजुमदार ने की और न्यायमूर्ति मोहम्मद शफीउल आलम महमूद और न्यायमूर्ति मोहितुल हक इनाम चौधरी इस पीठ के अन्य सदस्य हैं।

उधर गत जुलाई विद्रोह में मारे गए और घायल हुए लोगों के परिवारों ने इस फैसले का स्वागत किया और इसे "न्याय की दिशा में लंबे समय से प्रतीक्षित कदम" बताया। उन्होंने सरकार से अपील की है कि इस फैसले पर शीघ्र अमल सुनिश्चित किया जाए।

निर्णय सुनाये जाने के बाद देश के कुछ हिस्सों में हिंसा भड़क उठी। ढाका में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस, सेना और रैपिड एक्शन बटालियन ने लाठियों, और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। इस प्रदर्शन में कई लोगों के घायल होने का समाचार है।

देश की मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने शेख हसीना को दी गई मौत की सजा को "ऐतिहासिक फैसला" बताते हुए कहा है कि इसके राजनीतिक और सामाजिक मायने गहरे हैं। सरकार ने जनता से शांति बनाए रखने की अपील की है और चेतावनी दी है कि "अराजकता या सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने की किसी भी कोशिश को सख्ती से दबाया जाएगा।"इस फैसले के बाद भी शेख हसीना के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण में तीन और मामले अभी लंबित हैं। इन पर भी फैसला होना शेष है। न्यायालय की कार्यवाही 04 अगस्त से शुरू हुई थी और 23 अक्टूबर को बहस पूरी हुई। इसके बाद 13 नवम्बर को निर्णय की तारीख तय की गई थी, जिसे बाद में 17 नवम्बर के लिए निर्धारित किया गया।

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