नोएडा , जनवरी 07 -- उत्तर प्रदेश के नोएडा सेक्टर 62 स्थित फोर्टिस अस्पताल द्वारा शहर में बढ़ती खराब वायु गुणवत्ता तथा सांसों से जुड़ी विभिन्न बीमारियों के मरीजों की संख्या में इजाफा को लेकर विशेष रूप से एक एरोक्लीनिक शुरुआत की गई।
अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा बुधवार को क्लीनिक के संचालन की जानकारी देते हुए बताया कि नोएडा-एनसीआर में लगातार वायु प्रदूषण के मद्देनज़र बिगड़ती वायु गुणवत्ता की वजह से फेफड़ों से संबंधित रोगों के उपचार के लिए डॉक्टरों की रिसर्च के उपरांत खास उपकरणों तैयार कर इस क्लीनिक में अस्थमा (दमा) तथा अन्य क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनेरी रोगों (सीओपीडी) के लिए साक्ष्य-आधारित प्रबंधन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। क्लीनिक का मकसद सांस संबंधी पुराने रोगों से पीड़ित मरीजों को बेहतर उपचार सुविधाएं प्रदान करना तथा दीर्घकालिक आधार पर रोगों का नियंत्रण करना है।
मौजूदा हालात में दिल्ली-एनसीआर की खराब वायु गुणवत्ता के चलते यहां सीओपीडी तथा अस्थमा जैसी स्वास्थ्य समस्याएं गंभीर होती जा रही हैं और यहां के निवासियों के लिए परेशानी बनती जा रही हैं। वायु प्रदूषण के खराब स्तर की वजह से, खासतौर से हवा में मौजूद महीन कणों से, श्वास नली तथा फेफड़ों के लिए परेशानी बढ़ जाती है, जो अस्थमा एवं सीओपीडी के लक्षणों को बढ़ाती है, इस कारण पूरे क्षेत्र में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है जिन्हें सांस लेने में तकलीफ, लंबे समय से खांसी की समस्या, और सीने में जकड़न जैसी समस्याएं हैं।
उन्होंने बताया कि इससे भी अधिक चिंता का विषय यह है कि वायु प्रदूषण की वजह से केवल वे लोग ही प्रभावित नहीं हैं जो पहले से ही सांस संबंधी रोगों के शिकार हैं, बल्कि वे भी बीमार पड़ रहे हैं जो पूर्व में किसी भी प्रकार के फेफड़ों के मरीज नहीं रहे हैं, वायु प्रदूषण के मौजूदा हालात के चलते खासतौर से कम उम्र के बच्चों और बुजुर्ग आबादी के लिए खतरा काफी हद तक बढ़ गया है, बार बार और लगातार खराब हवा में रहने की वजह से उनकी बीमारी गंभीर होती जाती है और जीवनशैली पर भी असर पड़ता है।
पल्मोनोलॉजी एडिशनल डायरेक्टर द्वारा बताया गया कि एरोक्लीनिक को डायग्नॉसिस से प्राप्त साक्ष्य के आधार पर उपचार के जरिए विस्तृत मूल्यांकन तथा व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करने के लिए शुरू किया गया है। क्लीनिक में 'इन्हेल्ड' थेरेपी पर जोर दिया जाएगा और ऐसे मरीजों की पहचान की जाएगी जिन्हें बायोलॉजिक्स जैसी उन्नत उपचार सुविधाओं की जरूरत है। साथ ही, इन्हेलर तकनीक में सुधार, उसका पालन और स्टेरॉयड्स के अनावश्यक उपयोग संबंधित समस्या तथा निरंतरता पर भी जोर रहेगा। ऐरोक्लीनिक के लॉन्च के साथ ही सांस और फेफड़ों की तकलीफों से जूझ रहे मरीजों के लिए अत्याधुनिक उपचार सुविधाएं प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता को मजबूती दी है। यह पहल केवल लक्षणों के प्रबंधन तक ही सीमित नहीं होगी, बल्कि मरीजों को लगातार रोग नियंत्रण में मदद पहुंचाते हुए उनके लिए दीर्घकालिक परिणामों को सुनिश्चित करेगी। इससे अस्थमा एवं सीओपीडी के शिकार मरीजों की जीवन गुणवत्ता में भी सुधार होगा।
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