लखनऊ , जनवरी 28 -- किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) परिसर स्थित स्कूल ऑफ इंटरडिसिप्लिनरी बायोडिजाइन - सिग्नलिंग हेल्थकेयर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (एसआईबी- शाइन) को फुट ड्रॉप रोगियों के लिए विकसित नवीन मेडिकल डिवाइस के लिए एक और पेटेंट प्राप्त हुआ है। यह डिवाइस मरीजों को सामान्य रूप से चलने में मदद करता है और समय के साथ उनकी चलने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार लाता है।

इस डिवाइस का विकास बायोडिजाइन फेलो इंजीनियर कुशल अस्थाना एवं इंजीनियर पंकज प्रसाद द्वारा किया गया है। परियोजना को क्लिनिकल मार्गदर्शन केजीएमयू के भौतिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विभाग (डीपीएमआर) के विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. अनिल गुप्ता तथा डॉ. गणेश कुमार ने प्रदान किया, जबकि इंजीनियरिंग मार्गदर्शन आईआईटी कानपुर के प्रो. अर्जुन रामकृष्णन द्वारा दिया गया है।

यह एक पहनने योग्य (वेयरेबल) उपकरण है, जिसे घुटने के नीचे आसानी से पहना जा सकता है। यह डिवाइस पैर की नसों को हल्के विद्युत संकेत भेजकर पैर और उंगलियों की गति को सक्रिय करता है, जिससे हर कदम के साथ संकेत मिलते हैं और मरीज का पैर सामान्य स्थिति में आता है। इससे फिसलने की समस्या कम होती है और चलने में संतुलन बेहतर होता है।

कार्यक्रम के कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. ऋषि सेठी और आईआईटी कानपुर के जैव विज्ञान एवं जैव अभियंत्रण विभागाध्यक्ष प्रो. अमिताभ बंद्योपाध्याय ने इस उपलब्धि पर टीम को बधाई दी है। कुलपति प्रो. डॉ. सोनिया नित्यानंद ने भी सराहना करते हुए कहा कि यह पहल मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को नई दिशा दे रही है।

वरिष्ठ कार्यक्रम प्रबंधक इंजीनियर सुमित कुमार वैश्य ने बताया कि पिछले दो वर्षों में संस्थान द्वारा आठ पेटेंट आवेदन दाखिल किए गए हैं, जिनमें से चार को स्वीकृति मिल चुकी है। वहीं स्टार्टअप बायोस्टिम इनोवेशंस ने अब तक एक करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्राप्त किया है और इसका उत्पाद बाजार में उपलब्ध है, जिसे ऑनलाइन खरीदा जा सकता है।

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