कोलकाता , जनवरी 28 -- पश्चिम बंगाल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सिंगूर पर खाली पड़ी टाटा नैनो प्लांट की ज़मीन पर एक बड़ी रैली को संबोधित किया और इतिहास, विकास और बड़े दावे के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हमला बोला ।
सुश्री बनर्जी ने मंगलवार को इस दौरान संयंत्र के विरोध की यादों, विकास के दावों और 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले इस इलाके पर भाजपा की दृष्टि की आलोचना की। गौरतलब है कि सिंगूर कभी बंगाल के सबसे अहम राजनीतिक आंदोलनों में से एक का केंद्र रहा था। सुश्री बनर्जी की रैली के बाद एक फिर से सुर्खियों में आ गया है।
मुख्यमंत्री ने 2011 में तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन किसानों की ज़मीन चली गई थी, उन्हें अब मुआवज़ा, खाद्य साथी योजना के तहत मुफ्त चावल और स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि रोज़गार पैदा करने के लिए 9.2 करोड़ रुपये के निवेश से आठ एकड़ में फैला सिंगूर एग्रो इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किया गया है।
सुश्री बनर्जी ने बताया कि 28 में से 25 प्लॉट पहले ही आवंटित किये जा चुके हैं। उन्होंने कहा, "खेती के साथ-साथ उद्योग भी होगा। एक बड़ा 77 एकड़ का निजी औद्योगिक पार्क, सिंगूर एग्रो इंडस्ट्रियल एरिया प्रोजेक्ट (एसएआईपीP) भी बन रहा है, जहाँ अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियों के गोदाम बनाने की उम्मीद है, जिससे हज़ारों लोगों को नौकरियाँ मिलेंगी।"उनके लगभग 48 मिनट के भाषण में सिंगूर का ज़िक्र अहम है क्योंकि यह खेती की ज़मीन सुश्री बनर्जी की राजनीतिक यात्रा में एक खास जगह रखती है। वर्ष 2006 में, तत्कालीन वाम मोर्चा ने टाटा मोटर्स के नैनो कार संयंत्र के लिए लगभग 1,000 एकड़ उपजाऊ ज़मीन अधिग्रहित की थी। उस समय किसानों और बटाईदारों ने ज़बरदस्ती ज़मीन अधिग्रहण के आरोपों के बीच बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया था।
उस समय सुश्री बनर्जी इस आंदोलन का चेहरा बनकर उभरी थीं। उन्होंने धरने दिए और 26 दिन की भूख हड़ताल की, जिससे सिंगूर को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली और राज्य की राजनीतिक चर्चा का रुख बदल गया। वर्ष 2008 में, लगातार अशांति के बीच टाटा मोटर्स सिंगूर से हट गई और परियोजना को गुजरात के सानंद में शिफ्ट कर दिया।
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