वडोदरा , फरवरी 06 -- स्मृति मंधाना ने फ़्लू से लड़ते हुए ना सिर्फ़ रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) को दूसरी बार डब्ल्यूपीएल ख़िताब जिताया, बल्कि ख़ुद सामने से नेतृत्व करते हुए इस जीत में 41 गेंदों पर 87 रन बनाकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आरसीबी के प्रमुख कोच मलोलन रंगराजन ने दिल्ली कैपिटल्स के ख़िलाफ छह विकेट की जीत के बाद कहा, "उन्हें (स्मृति को) तेज बुखार था और हालत सच में खराब थी। लेकिन फिर भी वह मैदान पर आईं और एक पल के लिए भी किसी को महसूस नहीं होने दिया कि उन्हें फ़्लू है। टीम में यह किसी को पता तक नहीं था। यही स्मृति हैं। जब आज दोपहर मैंने उनसे बात की तो उन्होंने कहा, 'नहीं, मालो, कोई प्रॉब्लम नहीं, मैं खेलूंगी।' यही उनका वर्क एथिक है।"मंधाना के ऊंचे मानकों के हिसाब से भी यह पारी बड़े दबाव में लक्ष्य का पीछा करने की एक शानदार मिसाल थी। शुरुआत में उन्होंने अपनी ऑस्ट्रेलियाई साथी जॉर्जिया वॉल को स्ट्राइक दी और फिर अपने खेल के रफ़्तार को भी बढ़ाया।
पांचवें ओवर के अंत में मंधाना पांच गेंदों पर छह रन पर थीं, उसके बाद उन्होंने तबाही मचानी शुरू की। उनकी पारी की सबसे बड़ी ख़ासियत यह रही कि उन्होंने दिल्ली की स्पिन गेंदबाज़ी को कैसे तोड़ा। आरसीबी की इकलौती बाएं हाथ की बल्लेबाज होने के नाते, मंधाना ने श्री चरणी की बाएं हाथ की स्पिन पर हमला किया, जो वडोदरा चरण में काफी असरदार रही थीं। इससे डीसी की कप्तान जेमिमा रॉड्रिग्स के पास कोई विकल्प नहीं बचा।
मंधाना ऐसे ज़ोन में थीं, जहां वह एक जैसी गेंदों को अलग-अलग जगह भेज रही थीं। वह कभी पीछे हटकर शॉर्ट गेंद को प्वाइंट के ऊपर से मार रही थीं, तो कभी स्टंप्स के एक्रॉस जाकर उसी तरह की गेंद को लॉन्ग-ऑन और डीप मिडविकेट के बीच उड़ा रही थीं।
इतना अनुभव होने के बावजूद स्नेह राणा के पास भी मंधाना के आक्रमण का कोई जवाब नहीं था। आरसीबी ने हर ओवर में कम से कम एक बाउंड्री लगाई और मंधाना का पीछे हटकर राणा को वाइड लॉन्ग-ऑफ़ के ऊपर से इनसाइड आउट मारना इसकी एक बानगी भर थी। उन्होंने इस सीजन का अंत टॉप स्कोरर के रूप में 377 रनों के साथ किया।
रंगराजन ने कहा, "मुझे लगता है कि उन्होंने अपनी बेहतरीन पारियों में से एक को फ़ाइनल के लिए बचाकर रखा था। जिस तरह से उन्होंने बल्लेबाज़ी की, वह. अमानवीय? मुझे नहीं पता इसे क्या कहूं। इतनी क्लासी, इतनी एलिगेंट, ऐसा नहीं लगा कि वह दबाव में हैं। उन्हें देखकर साफ दिख रहा था कि वह पूरी तरह नियंत्रण में थीं। वह गेंद को टाइम कर रही थीं, हिट कर रही थीं और तय कर रही थीं कि कहां आक्रमण करना है।
"उन्होंने मैच से दो दिन पहले अभ्यास किया था और हम उनकी बल्लेबाज़ी को लेकर काफ़ी बातचीत कर रहे थे। मुझे लगता है कि उनका आख़िरी अभ्यास सत्र (बुधवार को) उनके बेहतरीन सत्रों में से एक था।"सोच में यह बदलाव लीग के आख़िरी मैच में आया, जब आरसीबी लगातार दो हार के बाद वापसी करना चाह रही थी। प्ले-ऑफ़ में उनकी जगह पक्की थी, लेकिन उन्होंने यूपी वॉरियर्ज़ के ख़िलाफ़ 27 गेंदों पर नाबाद 54 रन बनाकर अपनी टीम को सीधे फ़ाइनल में पहुंचा दिया। यह पारी इसलिए भी अहम थी क्योंकि उन्होंने तेज खेलने के साथ-साथ शॉट चयन और एग्ज़ीक्यूशन दोनों में निरंतरता भी दिखाई।
बैकग्राउंड की बातें साझा करते हुए रंगराजन ने कहा, "मंधाना अपने खेल के हर पहलू में 'फ़ील' वाली खिलाड़ी हैं- बैट टैप करने के तरीके में, बैट नीचे आने के तरीके में और गेंद को मिडिल करने पर होने वाले एहसास में। शायद यही वजह है कि वह ज़िंदगी में हमेशा बेहतर बनने की कोशिश और हमेशा अपने स्किल को निखारने की कोशिश में रहती हैं।
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