श्रीनगर , अक्टूबर 30 -- जम्मू-कश्मीर में फल उद्योग के हितों की रक्षा करने, फलों से लदे ट्रकों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने और फसलों के लिए बीमा योजना शुरू करने के लिए कई कदम उठाये गये हैं।
विधायक तारिक हमीद क़ारा द्वारा विधानसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में सरकार की ओर से बताया गया कि फलों से लदे वाहनों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए यातायात पुलिस और परिवहन विभाग के साथ नियमित समन्वय बैठकें आयोजित की जाती हैं। इसके अलावा फलों से लदे ट्रकों की समय पर निकासी सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरणों और जिला प्रशासनों के साथ भी गहन समन्वय बनाए रखा जाता है।
सरकार ने कहा कि यदि ट्रकों की कमी होती है, तो जेकेएसआरटीसी के साथ साझेदारी के माध्यम से अतिरिक्त वाहन उपलब्ध कराए जाते हैं। इसके अलावा भारतीय रेलवे के माध्यम से बागवानी उत्पादों के परिवहन के लिए रेल सेवाएँ शुरू की गई हैं जिससे देश के विभिन्न बाज़ारों तक कम लागत और तेज़ परिवहन संभव हुआ है।
इसमें बताया गया है कि सितंबर 2025 में बारिश और राजमार्ग बंद होने के दौरान, बडगाम और अनंतनाग से जम्मू और दिल्ली के आदर्श नगर तक ट्रेन से सेब की 1,25,376 पेटियाँ भेजी गईं। कश्मीर घाटी की विभिन्न फल और सब्जी मंडियों से इस माह 23 तारीख तक लगभग 14,000 टन (9 लाख पेटियाँ) सेब देश के अन्य हिस्सों में भेजे गए। फलों से लदे ट्रकों के परिवहन के लिए मुगल रोड को वैकल्पिक मार्ग के रूप में पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है।
इसमें बताया गया है कि जम्मू-कश्मीर में 'पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना' लागू करने का निर्णय लिया गया है, जिसके तहत सेब, केसर, आम और लीची को बीमा सुरक्षा के दायरे में लाया जाएगा। इस संबंध में बीमा कंपनियों के चयन की प्रक्रिया चल रही है, ताकि किसानों और बागवानों को पर्यावरणीय आपदाओं से बचाया जा सके।
सरकार ने बताया कि हाल ही में हुई बारिश और बाढ़ के दौरान 431.091 हेक्टेयर क्षेत्र में फसलें बुरी तरह प्रभावित हुयी हैं जिससे 33 प्रतिशत से अधिक फसल का नुकसान होने का अनुमान है। इसमें कुल 152.37 लाख रुपये का मुआवज़ा घोषित किया गया है, जिसमें से 12.28 लाख रुपये पहले ही स्वीकृत या भुगतान किए जा चुके हैं। शोपियां जिले में ओलावृष्टि से प्रभावित 2036 बागवानों को एसडीआरएफ के तहत 47.28 लाख रुपये की सहायता प्रदान की गई है।
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