पटना, जनवरी 21 -- बिहार की राजधानी पटना स्थित निगरानी की एक विशेष अदालत ने फर्जी महाविद्यालय संचालन के मामले में बुधवार को छह आरोपितों के खिलाफ आरोप तय कर दिए। निगरानी की विशेष अदालत के न्यायाधीश मोहम्मद रुस्तम ने खुली अदालत में रहमत आलम कॉलेज ऑफ एजुकेशन मधेपुरा के सचिव नसीम रहमानी समेत नाथन प्रसाद यादव ,मनोज प्रसाद यादव, सारंगधर प्रसाद यादव, माला शरण पाठक और परमानंद यादव को उनके खिलाफ लगाया गये आरोपों को सुनाया । आरोपों को सुनने के बाद आरोपितों ने अपने ऊपर लगाये गये आरोपों से इंकार किया और विचारण का दावा किया। जिसके बाद अदालत ने मामले में अभियोजन को अपने गवाह पेश करने के लिए अगली तिथि निश्चित कर दी ।
मामले की प्राथमिकी वर्ष 1999 में निगरानी थाना में दर्ज की गई थी। मामले के विशेष लोक अभियोजक श्रद्धानंद पासवान ने बताया कि आरोप के अनुसार वर्ष 1987 से 1999 के बीच आरोपितों ने एक आपराधिक षड्यंत्र के तहत एक फर्जी कॉलेज रहमत आलम कॉलेज ऑफ एजुकेशन की स्थापना मधेपुरा के अंजोरी इलाके में दिखाई और उसे फर्जी तरीके से भूपेंद्र नाथ मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा से संबंंधता प्राप्त कराई । महाविद्यालय में ना तो शिक्षण कार्य होता था, ना ही अपना कोई भवन था और ना ही कोई छात्रावास था। विश्वविद्यालय के साथ एक आपराधिक षड्यंत्र के तहत महाविद्यालय से फर्जी छात्रों को परीक्षा दिलाकर फर्जी तरीके से डिग्री दिलाई जाती थी। कॉलेज में नियमानुसार कोई कर्मचारी भी नहीं था। महाविद्यालय और विश्वविद्यालय के बीच पत्राचार आदि का काम कुछ आरोपित करते थे ।
निगरानी ने वर्ष 2007 में अनुसंधान के बाद इस मामले में 33 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। वर्तमान में 15 आरोपितों के खिलाफ मुकदमा लंबित था। जिसमें से सात लोगों की ओर से कोई पैरवी नहीं हो रही थी और आज बाकी बचे आठ लोगों में से छह लोग सशरीर उपस्थित थे । अदालत ने इन आरोपितों का अभिलेख अलग कर उनके खिलाफ आरोप तय कर दिए ।
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