कोलकाता , जनवरी 05 -- पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर अपना हमला तेज़ करते हुए कहा है कि इस प्रक्रिया से सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस घबरा गयी है क्योंकि इससे 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले 'फर्जी मतदाताओं' और अन्य अनियमितताओं का खुलासा होने का खतरा है।
श्री अधिकारी ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखा है, जिसमें एसआईआर प्रक्रिया की सुश्री बनर्जी की आलोचना और इसे रोकने की उनकी अपील का जवाब दिया है। उन्होंने कहा, "मैंने मुख्य चुनाव आयुक्त को एक पत्र लिखा है, जिसमें सुश्री बनर्जी के एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ हताशा भरे झूठ और एसआईआर को रोकने की उनकी हालिया अपील काे पूरी तरह से खारिज किया गया है।"मुख्यमंत्री की आपत्तियों को 'पूरी तरह से मनगढ़ंत' बताते हुए श्री अधिकारी ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची संशोधन से तृणमूल कांग्रेस द्वारा कथित तौर पर संरक्षित कदाचार का खुलासा हो रहा है। उन्होंने दावा किया, "वास्तव में यह ईसीआई अभियान तृणमूल के गंदे रहस्यों को उजागर कर डाल रहा है। फर्जी मतदाता, मृत लोगों के नाम, और अवैध घुसपैठिए जिन्हें उन्होंने वर्षों से चुनाव में धांधली करने के लिए संरक्षित किया है।" उन्होंने कहा कि सुश्री बनर्जी का विरोध राजनीतिक चिंता से उपजा है। उन्होंने कहा, "यह बिल्कुल स्पष्ट है कि सुश्री बनर्जी घबरा रही हैं क्योंकि एसआईआर उनके 2026 के सपनों को चकनाचूर करने की घंटी है।"श्री अधिकारियों की ओर से टिप्पणियां राज्य में चुनाव आयोग के चल रहे विशेष गहन संशोधन को लेकर बढ़ते राजनीतिक घमासान के बीच आई हैं। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जो समय-समय पर चुनावी सूचियों को सत्यापित और अपडेट करने के लिए की जाती है, जिसमें नकली , मृत या अयोग्य नामों को हटाया जाता है और योग्य मतदाताओं को जोड़ा जाता है।
श्री अधिकारी की ये टिप्पणियां राज्य में चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे एसआईआर को लेकर तेज़ होते राजनीतिक टकराव के बीच आई हैं। यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसे समय-समय पर मतदाता सूचियों के सत्यापन और अद्यतन के लिए अपनाया जाता है, जिसमें डुप्लीकेट, मृत या अयोग्य नामों को हटाया जाता है और पात्र मतदाताओं को जोड़ा जाता है।
चुनाव आयोग ने हालांकि कहा है कि यह एक नियमित प्रक्रिया है और इसका मकसद निष्पक्ष चुनाव कराना है लेकिन तृणमूल कांग्रेस ने आयोग पर राजनीतिक दबाव में काम करने का आरोप लगाया है और संभावित वोटर के नाम हटाने को लेकर चिंता जताई है। मुख्यमंत्री ने एसआईआर के समय और इरादे पर बार-बार सवाल उठाया है। तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इसका गलत इस्तेमाल खास समुदायों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है। तृणमूल ने इस में सुरक्षा उपायों और ज़्यादा पारदर्शिता लाने की मांग की है। साथ ही आयोग से इस प्रक्रिया को रोकने का आग्रह भी किया है। भाजपा ने हालांकि चुनाव आयोग के इस कदम का समर्थन किया है और कहा है कि चुनावी निष्पक्षता के लिए एक सही मतदाता सूची ज़रूरी है। श्री अधिकारी का मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखा गया पत्र, जिसका ज़िक्र उन्होंने अपनी पोस्ट में किया था, विपक्षी नेताओं द्वारा चुनाव आयोग से बिना किसी राजनीतिक दखल के रिवीजन जारी रखने का आग्रह करने वाले कई ज्ञापनों में से सबसे नया है। कुछ ही महीनों में 2026 के विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में मतदाता सूची को लेकर यह लड़ाई एक शुरुआती टकराव का मुद्दा बन गई है, जो पश्चिम बंगाल में चुनाव कराने को लेकर राज्य की सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष के बीच बढ़ते अविश्वास को दिखाता है।
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