रामपुर , दिसंबर 05 -- रामपुर की एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को फर्जी पासपोर्ट मामले में पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम को दोषी करार देते हुये अधिकतम सात साल की सज़ा और 50 हजार रुपए का जुर्माना किया है।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अब्दुल्लाह आजम को एमपी एमएलए कोर्ट में पेश किया गया। अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता स्वदेश कुमार शर्मा ने बताया कि क्राइम नंबर 594/ 2019 में न्यायालय ने गिल्टी होल्ड किया है। अब्दुल्ला आजम पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 में सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है। 420 में 3 साल और 10000 रुपये जुर्माना, 467 में 7 वर्ष की सजा और 20000 रुपये जुर्माना, 468 में 3 साल की सजा और 10000 रुपये जुर्माना, वहीं 471 में 2 साल की सजा और 10000 रुपये का जुर्माना का प्रावधान किया गया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर सजा का समय बढ़ जाएगा। धारा 467 में अब्दुल्ला आजम को 7 साल की सजा और 50000 रुपये कुल जुर्माना अधिकतम आयद किया गया है।

साल 2019 में शहर के वर्तमान विधायक भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने अब्दुल्लाह आजम के खिलाफ बेइमानी और फर्जी डॉक्यूमेंट के आधार पर फर्जी पासपोर्ट का मुकदमा लिखवाया गया था। इसमें करीब 36 गवाह की लिस्ट डिफेंस पेश की गई थी, जिसमें डिफेंस के 19 गवाह को परीक्षित किया गया। साक्ष्य के आधार पर धारा 467 में अधिकतम सजा दी गई है। इसी धारा में आजीवन कारावास का भी प्रावधान है।

अभियोजन अधिकारी स्वदेश कुमार शर्मा ने बताया कि जजमेंट की कॉपी की समीक्षा के बाद अगर जरूरत महसूस हुई तो इसमें और सजा के लिए अपील भी की जाएगी। अब्दुल्लाह आजम को इस दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया गया। अब्दुल्लाह आजम इस केस में अकेले आरोपी थे, जिन पर फर्जी गलत डॉक्यूमेंट के आधार पर पासपोर्ट बनवाकर जर्नी करना और अन्य उपयोग में लेने का आरोप था जो आज एमपी एमएलए कोर्ट में साबित हुआ। जजमेंट की 400 से ज्यादा पन्नों की कॉपी है।

सभी सजा एक साथ चलेंगी। एमपी एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश शोभित बंसल ने सज़ा का प्रावधान किया।

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