नयी दिल्ली , दिसंबर 04 -- विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को संसद में बताया कि पांच फरवरी के बाद अमेरिका से गैरकानूनी प्रवेश के आधार पर वापस भेजे गये किसी भी भारतीय नागरिक को हथकड़ी-बेड़ी नहीं लगायी गयी है।

राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) के रामजी लाल सुमन के एक अनुपूरक प्रश्न के जवाब में श्री जयशंकर ने कहा कि भारत ने 25 सितंबर को भेजी गयीं हरजीत कौर नाम की महिला के वकील ने लिखित बयान में कहा है कि उनको विमान से वापस भेजते समय हथकड़ी नहीं लगायी गयी थीं।

श्री सुमन ने कहा था कि 33 वर्ष से अमेरिका में रहने वाली 73 वर्षीय इस महिला को वापस भेजते समय हथकड़ी डाल कर भेजा गया था।

विदेश मंत्री ने कहा कि यह जरूर है कि श्रीमती हरजीत कौर को अमेरिका में हिरासत में रखे जाने के दौरान उनके साथ बुरा बरताव किया गया था। यह मामला भारत ने अमेरिकी दूतावास के समक्ष उठाया है और उसपर जांच कराने की मांग की।

उन्होंने कहा कि अमेरिका से जिन भारतीय नागरिकों को अवैध आव्रजन के आधार पर वापस भेजा जाता है, उनमें से प्रत्येक से भारतीय अधिकारी निश्चित रूप से बात करते हैं और उनका बयान लेते हैं। श्रीमती कौर से बात करने वाले आव्रजन अधिकारी ने भी कहा है कि महिला को हथकड़ी नहीं लगायी गयी थी।

श्री जयशंकर ने एक अन्य अनुपूरक सवाल के जवाब में कहा कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के मानव तस्करी प्रभाग ने पिछले कुछ समय में मानव तस्करी के 27 मामले दर्ज कर जांच की है और 169 लोगों को गिरफ्तार कर 132 के खिलाफ आरोप पत्र दायर किये हैं।

एजेंसी ने हाल में हरियाण और पंजाब में दो तस्करों तथा हिमाचल प्रदेश में दो लोगों और गुजरात में कुछ ट्रैवेल एजेंटों की गिरफ्तारियां की हैं जो मानव तस्करी में संलिप्त थे। इसके अलावा, कई राज्यों ने भी इस मामले में अपने स्तर पर कार्रवाई की है।

उन्होंने कहा कि पंजाब मानव तस्करी की कुप्रथा से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में है। वहां की सरकार ने मानव तस्करी से निपटने के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) और एक तथ्यान्वेषी समिति का गठन किया है। पंजाब ने मानव तस्करी के आरोप में 58 ट्रैवेल एजेंटों के खिलाफ 25 एफआईआर दर्ज की गयी हैं। वहां पुलिस ने 16 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है।

इसी तरह हरियाणा में मानव तस्करी के 2,325 मामलों में 44 एफआईआर दर्ज की गयी हैं और 27 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

अमेरिका में सोशल मीडिया पोस्ट और गाजा आदि के मुद्दों को लेकर विद्यार्थी वीजा रद्द किये जाने के मुद्दे पर इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के हारिस बीरन के अनुपूरक प्रश्न पर विदेश मंत्री ने कहा कि वीजा देना, न देना हर देश का संप्रभु अधिकार है, पर भारत ने अमेरिकी अधिकारियों को समझाने का प्रयास किया है कि छोटे-मोटे अपराधों को आधार बनाकर छात्र वीजा रद्द करना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यह समस्या इस वर्ष अप्रैल में अमेरिकी विदेश मंत्री द्वारा नयी वीजा नीति की घोषणा के बाद शुरू हुई है जिसमें हल्के मामलों में वीजा रद्द करने की घटनाएं हुई हैं।

उन्होंने कहा कि मंत्रालय को भारतीय विद्यार्थियों के साथ ऐसी किसी घटना की जानकारी होने पर भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावासों ने हस्तक्षेप किया है।

उन्होंने कहा कि हाल में अमेरिका ने यह रुख अपनाया है कि वीजा के बारे में उसका हर निर्णय राष्टीय सुरक्षा से जुड़ा विषय है। अमेरिका ने छात्र वीजा पर वहां जाने वाले लोगों को अपने सोशल मीडिया खातों की सेटिंग प्राइवेट की जगह पब्लिक सेटिंग में रखने का निदेश दिया है ताकि वे उनकी निगरानी कर सकें।

श्री बीरन ने एक अन्य अनुपूरक प्रश्न में कहा कि केरल पुलिस द्वारा लोगों को अवैध तरीके से विदेश भेजने के मामले में राज्य में काम कर रहे 531 एजेंटों ने मंत्रायलय को अवैध ट्रैवेल एजेंटों के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति के लिए मंत्रालय से मांगी गयी स्वीकृतियों में केवल तीन प्रतिशत मामलों में ही अब तक स्वीकृति मिली है। उन्होंने जानना चाहा कि क्या सरकार निमय कानून में संशोधन कर राज्यों को ऐसे मामले में सीधे कार्रवाई की अनुमति देने पर विचार कर सकती है?इसके जवाब में विदेश मंत्री ने कहा कि उनका विभाग पूरी मुस्तैदी के साथ फैसला करता है।

मंत्री ने लिखित उत्तर में सदन को बताया कि 2009 से अब तक 18,822 भारतीयों को अमेरिका में गैरकानूनी तरीके से प्रवेश करने के आरोप में निर्वासित किया गया है। इसमें 3,258 को इस साल वापस भेजा गया है।

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