कोलकाता , जनवरी 22 -- चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिला प्रशासन को फरक्का बीडीओ कार्यालय में इस महीने की शुरुआत में तोड़फोड़ करने के मामले में गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस विधायक मोनिरुल इस्लाम के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया।
आयोग ने जिला मजिस्ट्रेट और जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि गुरुवार को एफआईआर दर्ज कर ली जाए।
यह निर्देश 14 जनवरी की एक घटना के बाद दिया गया है जब इस्लाम अपने समर्थकों के साथ फरक्का बीडीओ कार्यालय पहुंचे और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का विरोध करते हुए नारेबाजी की।
आरोपों के अनुसार, विरोध प्रदर्शन तब और बढ़ गया जब इस्लाम और उसके समर्थकों ने जबरन कार्यालय में प्रवेश किया, आम लोगों को बाहर धकेल दिया और बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ की, जिससे इलाके में व्यापक अशांति फैल गई।
फरक्का की घटना के तुरंत चुनाव आयोग ने इस घटना का संज्ञान लिया और राज्य पुलिस से इस मामले पर बात की। आयोग ने पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार से फोन पर बात की और एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया।
हालांकि बाद में फरक्का पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई लेकिन उसमें इस्लाम को आरोपी नहीं बनाया गया जिससे विवाद और बढ़ गया। इसके बाद आयोग ने फिर हस्तक्षेप किया और इस बार इस्लाम को नामजद करते हुए एफआईआर दर्ज करने का स्पष्ट निर्देश दिया।
फरक्का में अशांति की शुरुआत बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) के एक समूह द्वारा विरोध प्रदर्शन करने से हुई, जिन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के नाम पर आम मतदाताओं को बार-बार परेशान किया जा रहा है। मानसिक दबाव का हवाला देते हुए, कुछ बीएलओ ने चुनावी पंजीकरण अधिकारी को सामूहिक रूप से इस्तीफा पत्र सौंपने का प्रयास किया।
हालात तब और बिगड़ गए जब इस्लाम ने प्रदर्शनकारियों के एक समूह का नेतृत्व करते हुए बीडीओ कार्यालय पर धावा बोला और एसआईआर के खिलाफ नारे लगाए, जिसके कारण कार्यालय परिसर पर कथित हमला हुआ।
एसआईआर को लेकर जारी गतिरोध के बीच चुनाव आयोग के खिलाफ कथित रूप से धमकी वाला इस्लाम का एक वीडियो बुधवार को सामने आया जिससे राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ और इसके मद्देनजर आयोग ने गुरुवार को यह कार्रवाई की।
वीडियो में कथित रूप से इस्लाम को यह कहते हुए सुना गया कि चुनाव आयोग को सबक सिखाया जाएगा और यहां तक कहा कि जमीन के नीचे से खोज निकाला जाएगा। हालांकि, यूनीवार्ता इस वीडियो के प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
भारतीय जनता पार्टी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को संवैधानिक संस्था को डराने-धमकाने की कोशिश करने के लिए जिम्मेदार ठहराया।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने एक्स पर एक पोस्ट में सत्तारूढ़ पार्टी पर अपने विधायक को बचाने का आरोप लगाया और कहा कि मुख्यमंत्री और राज्य की गृह मंत्री ममता बनर्जी अधिकारियों को धमकाने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं।
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