नयी दिल्ली , जनवरी 08 -- प्लास्टिक-मोल्डेड फर्नीचर बनाने वाली कंपनी एव्रो इंडिया ने गुरुवार को गाजियाबाद में अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस रीसाइक्लिंग संयंत्र का शुभारंभ किया।
इस संयंत्र का संचालन एव्रो रिसाइक्लिंग द्वारा किया जायेगा जो एव्रो इंडिया की शत-प्रतिशत स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। मासिक 500 टन की रिसाइक्लिंग क्षमता के साथ यह देश का सबसे बड़ा फ्लेक्सिबल प्लास्टिक रीसाइक्लिंग संयंत्र है। कंपनी ने वित्त-वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही तक इस क्षमता को बढ़ाकर 1,000 टन मासिक करने की योजना बनायी है।
कंपनी ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि इस रीसाइक्लिंग संयंत्र में 25 करोड़ रुपये का पूंजीगत निवेश किया गया है और वित्त वर्ष 2026-27 तक 30 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश की योजना है। वह आने वाले समय में देश के अन्य हिस्सों में भी रिसाइक्लिंग संयंत्र लगाने की योजना बना रही है। बीएसई और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध एव्रो इंडिया की स्थापना साल 2002 में हुई थी। उसके नेटवर्क में 24 राज्यों में 300 से ज्यादा वितरक और 30,000 से अधिक रिटेलर्स हैं।
कंपनी ने बताया कि तीन साल से अधिक के अनुसंधान, परीक्षण और टेक्नोलॉजी में नवाचार के बाद एव्रो ने अपना खुद का एक ऐसा सिस्टम तैयार कर लिया है जो इस तरह के जटिल प्लास्टिक कचरे को बड़े पैमाने पर बेहतर उपयोग के लायक बना सकता है।
एव्रो इंडिया के अध्यक्ष एवं पूर्णकालिक निदेशक सुशील कुमार अग्रवाल ने कहा, "देश में प्लास्टिक की समस्या का समाधान छिटपुट कोशिशों से संभव नहीं है। इसके लिए बड़े पैमाने पर प्रयास, टेक्नोलॉजी और मजबूत इरादे की जरूरत है। हमने कई साल तक अनुसंधान के बाद एक ऐसा सिस्टम तैयार किया है जो जटिल प्लास्टिक कचरे को मूल्यवान कच्चे माल में बदल देता है।"इस संयंत्र में रीसाइक्लिंग के बाद तैयार किए जाने वाले ग्रैन्यूल्स का इस्तेमाल प्लास्टिक फर्नीचर, एयर कूलर, वॉशिंग मशीन, गाड़ियों के पुर्जों के साथ-साथ उद्योगों तथा घरों में उपयोग होने वाली कई मूल्यवान चीजों के निर्माण में किया जाता है। वर्जिन प्लास्टिक के मुकाबले रिसाइक्लिंग से प्राप्त प्लास्टिक 40 प्रतिशत तक सस्ते होता है। ये ग्रैन्यूल्स कठोर तकनीकी मानकों पर खरे और बेहद टिकाऊ होते हैं। इससे निर्माताओं को लागत में बचत करने, नियमों का पालन करने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बने रहने में मदद मिलती है।
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