नैनीताल , मार्च 12 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने गुरुवार को जारी एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि प्राथमिक कृषि सहकारी समितियां 'राज्य' की श्रेणी में नहीं आती हैं।
इस आधार पर अदालत ने हरिद्वार सहकारी समिति के मामले में सुनवाई से इनकार कर दिया। हालांकि अदालत ने याचिकाकर्ता को समिति के रजिस्ट्रार के समक्ष प्रत्यावेदन देने की छूट दी है।
मामला हरिद्वार जिले की एक प्राथमिक कृषि सहकारी समिति से जुड़े कर्मचारी अनुज कुमार से संबद्ध है। इस मामले की सुनवाई आज न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की युगलपीठ में हुई।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि उसे पहले 89 दिनों के लिए दैनिक वेतन पर नियुक्त किया गया। उसकी सेवा अवधि समय-समय पर बढ़ाई गई और बाद में समिति द्वारा उसे लिपिक पद पर नियमित कर दिया गया।
हालांकि समिति के नए अध्यक्ष के कार्यभार ग्रहण करने के बाद 10 जुलाई 2019 को नियमितीकरण रद्द कर दिया गया। इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई।
अदालत ने एस.एस. राणा बनाम रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले का हवाला दिया। शीर्ष अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि यदि किसी सहकारी समिति पर सरकार का नियंत्रण नहीं है और सरकार उसमें बहुसंख्यक शेयरधारक भी नहीं है तो उसे संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत 'राज्य' की श्रेणी में नहीं माना जा सकता।
इसी आधार पर अदालत ने याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को संबंधित रजिस्ट्रार के समक्ष अपनी शिकायत रखने की स्वतंत्रता प्रदान की है।
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