गांधीनगर , फरवरी 27 -- गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्रभाई पटेल ने प्राकृतिक खेती को आज और आने वाले समय की अनिवार्यता बताते हुए कहा कि, 'पहला सुख निरोगी काया'। इस पारंपरिक उक्ति के लिए प्राकृतिक खेती ही समाधान है।

श्री पटेल ने गुजरात विधानसभा परिसर में आयोजित प्राकृतिक कृषि परिसंवाद में आज कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 'बैक टू बेसिक' का मंत्र दिया है। बैक टू बेसिक के माध्यम से केवल प्राकृतिक खेती ही नहीं, बल्कि मानव जीवन के स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले सभी स्रोतों के संवर्धन का मार्ग उन्होंने दिखाया है। पानी की समस्या दूर करने के लिए कैच द रेन, ग्लोबल वार्मिंग की चुनौतियों का सामना करने तथा ग्रीन कवर बढ़ाने के लिए 'एक पेड़ मां के नाम' और स्वास्थ्य के लिए रसायनमुक्त खेती के प्रधानमंत्री के इन अभियानों को व्यापक रूप से अपनाने का मुख्यमंत्री ने आह्वान किया।

श्री पटेल ने गुजरात में राज्यपाल आचार्य देवव्रत की प्रेरणा और सघन मार्गदर्शन से प्राकृतिक खेती जन-आंदोलन बनी है, इस पर प्रसन्नता जतायी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसान भविष्य की पीढ़ी को स्वस्थ-सुदृढ़ रखने का आत्मसंतोषपूर्ण कार्य कर रहे हैं। प्राकृतिक खेती का यह परिसंवाद अधिक से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित करेगा।

इस अवसर पर गुजरात विधानसभा के अध्यक्ष शंकरभाई चौधरी ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि जीवन जीने के लिए अत्यंत आवश्यक हवा और पानी को शुद्ध रखने के लिए 'प्राकृतिक कृषि' को अधिक से अधिक प्राथमिकता देना अत्यंत आवश्यक है। श्री देवव्रत गुजरात की जनता के लिए निरंतर संवेदनशीलता पूर्वक यह कार्य कर रहे हैं। पूज्य महात्मा गांधी और सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में स्वतंत्रता आंदोलन के लिए नेतृत्व गुजरात ने किया है। जबकि आज सुशासन के माध्यम से देश और विश्व को दिशा देने का कार्य श्री मोदी और श्री शाह कर रहे हैं।

श्री चौधरी ने कहा कि राज्यपाल श्री देवव्रत स्वयं गांव-गांव जाकर किसानों के बीच प्राकृतिक कृषि के लाभ बता रहे हैं। इस वर्ष गुजरात सरकार ने प्राकृतिक कृषि को लेकर बजट में भी बहुत बड़ी घोषणा की है। यह कार्य केवल सरकार का न रहे बल्कि विधानसभा के माध्यम से गुजरात के अंतिम नागरिक तक पहुंचे, इसके लिए हमें प्रयास करना होगा। यह जागरूकता लाने में मीडिया भी बहुत बड़ी भूमिका निभा सकता है।

कृषि मंत्री जीतुभाई वाघाणी ने इस अवसर पर धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि गुजरात विधानसभा सदन में इस प्रकार के प्राकृतिक कृषि के परिसंवाद का आयोजन होना पूरे राज्य के लिए गर्व की बात है। प्राकृतिक कृषि के ऋषि और गुजरात के राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत ने इस परिसंवाद के माध्यम से सभी को बहुत सरल भाषा में प्राकृतिक कृषि का मार्गदर्शन प्रदान किया है। उन्होंने सदन के सभी सदस्यों से अनुरोध करते हुए कहा कि प्राकृतिक कृषि आज के समय में मानव जीवन का सबसे संवेदनशील मुद्दा है, इसलिए सभी जनप्रतिनिधियों को भी अपने क्षेत्र में व्यक्तिगत रुचि लेकर प्राकृतिक कृषि के लिए किसानों को प्रोत्साहित करना चाहिए।

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