बेंगलुरु , जनवरी 12 -- कर्नाटक में वरिष्ठ वकील एमसी नंजप्पा ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर प्रस्तावित नफरती भाषण विधेयक कानून बन गया तो आम लोगों को भारी परेशानी होगी। उन्होंने इस अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल को याद किया, जिसमें इसी तरह के कानून का जनता ने कड़ा विरोध किया और अंतत: उसे लागू नहीं किया जा सका।

श्री नंजप्पा ने सिटीजंस फॉर डेमोक्रेसी की ओर से राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि अगर यह विधेयक कानून बन गया, तो इससे आम लोगों को बड़े पैमाने पर परेशानी हो सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि इसके प्रावधानों के तहत सामान्य घरेलू झगड़े या पड़ोसियों के बीच असहमति पर भी आपराधिक कार्रवाई हो सकती है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा कानून पहले से ही आपत्तिजनक और अपमानजनक भाषण से संबंधित मुद्दों को संबोधित करते हैं। उन्होंने कहा कि ड्राफ्ट में अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल के लिए कम से कम तीन साल की जेल और 50,000 रुपये के जुर्माने का प्रावधान है, जिसे सात साल तक बढ़ाया जा सकता है।

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