ग्वालियर , जनवरी 8 -- मध्यप्रदेश के ग्वालियर में पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन भाजपा सरकार की कठपुतली की तरह कार्य कर रहा है। यह आरोप गुरुवार को कांग्रेस के पूर्व मंत्री लाखन सिंह, राज्यसभा सांसद अशोक सिंह, विधायक डा. सतीश सिंह सिकरवार और साहब सिंह गुर्जर तथा मोहना जनपद पंचायत अध्यक्ष राधाकिशन धाकड़ ने संयुक्त रूप से पत्रकार वार्ता में लगाए।

कांग्रेस नेताओं ने बताया कि किसानों की मांगों, जनपद मोहना में सीएमओ द्वारा किए जा रहे कथित भ्रष्टाचार, खाद संकट सहित अन्य मुद्दों को लेकर कांग्रेस द्वारा जन आक्रोश रैली आयोजित की जानी थी। इस रैली में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, जयवर्धन सिंह, संजना जाटव सहित कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने का कार्यक्रम था। प्रारंभ में प्रशासन ने मौखिक रूप से अनुमति दी, लेकिन 7 जनवरी को सभा की तैयारियों के दौरान एक पटवारी के माध्यम से अनुमति निरस्त किए जाने की सूचना दी गई।

नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उच्च न्यायालय में संविधान निर्माता को लेकर चल रहे प्रकरण का हवाला देते हुए कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताई। कांग्रेस नेताओं द्वारा शपथ पत्र देकर कानून व्यवस्था बनाए रखने का आश्वासन देने के बावजूद प्रशासन ने जन आक्रोश सभा की अनुमति निरस्त कर दी।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जहां-जहां कांग्रेस के महापौर और जनपद अध्यक्ष हैं, वहां सरकार के प्रतिनिधि उन्हें काम नहीं करने दे रहे हैं। भ्रष्टाचार के सबूत देने के बाद भी न तो संबंधित अधिकारियों का तबादला किया गया और न ही कोई कार्रवाई हुई।

कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि इस बार उन्होंने प्रशासन का निर्णय स्वीकार कर लिया है, लेकिन यदि आगे भी कांग्रेस के प्रति शासन और प्रशासन का यही रवैया रहा तो आंदोलन किया जाएगा, चाहे इसके लिए जेल ही क्यों न जाना पड़े। नेताओं का यह भी कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों से प्रशासन को जो रिपोर्ट मिली थी, उसमें 30 से 40 हजार से अधिक लोगों के एकत्र होने की संभावना थी, इसी कारण अनुमति नहीं दी गई। पत्रकार वार्ता में प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता आरपी सिंह, राम पांडे, धर्मेंद्र शर्मा, शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह यादव, ग्रामीण जिलाध्यक्ष प्रभुदयाल दोहरे सहित अन्य कांग्रेसजन उपस्थित रहे।

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