कोलकाता , जनवरी 29 -- प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले को लेकर चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच विवाद गहरा गया है।

राज्य सरकार ने गुरुवार को चुनाव निकाय के उस निर्देश की समीक्षा करने की मांग की, जिसमें उसे चुनावी सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए तैनात भारतीय पुलिस सेवा (आईएएस) के तीन अधिकारियों के तबादले को रद्द करने के लिए कहा गया था।

सूत्रों ने बताया कि राज्य सरकार ने नबन्ना से चुनाव आयोग को पत्र लिखकर अपने आदेश पर फिर से विचार करने का आग्रह किया है, जिसमें तबादले को आयोग के निर्देशों का उल्लंघन बताया गया था।

इन तीनों अधिकारियों को आयोग ने मतदाता सूची के पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया था और राज्य द्वारा बिना अनुमति लिये उनका तबादला करने के फैसले को गलत बताया था।

चुनाव आयोग ने आईएएस अधिकारी अश्विनी कुमार यादव, रणधीर कुमार और स्मिता पांडे को एसआईआर अभ्यास के लिए 28 नवंबर को पर्यवेक्षक नियुक्त किया था।

श्री यादव को उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर, श्री कुमार को उत्तर 24 परगना और कोलकाता उत्तर, जबकि सुश्री पांडे को पश्चिम बर्धमान, पूर्वी बर्धमान और बीरभूम का पर्यवेक्षक बनाया गया था।

चुनाव आयोग के नियमों के तहत, चुनाव संबंधी काम के लिए तैनात अधिकारियों का तबादला या उन्हें आयोग की सहमति के बिना अतिरिक्त जिम्मेदारियां नहीं दी जा सकती है।

राज्य सरकार ने 31 दिसंबर से 21 जनवरी के बीच श्री यादव और श्री कुमार को अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपने और सुश्री पांडे का तबादला करने के आदेश जारी किए। इस कदम की जानकारी मिलने के बाद, चुनाव आयोग ने मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को पत्र लिखकर इन अधिकारियों के तबादले के आदेश को तुरंत रद्द करने और भविष्य में बिना अनुमति लिये ऐसे निर्देश जारी करने से बचने का निर्देश दिया था।

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