, Nov. 11 -- चोरमारा गांव में पहली बार मतदान कर रहे संतोष कुमार ने यूनीवार्ता से बातचीत में कहा कि लोग हिंसा से मुख्य धारा में लौटे तो हैं, लेकिन रोजगार इस क्षेत्र में आज भी बहुत बड़ी समस्या है और लोगो को रोजी रोटी के लिए दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों का रुख करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि सरकार यदि इस इलाके की वास्तविक बेहतरी चाहती है तो उसे युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार की व्यवस्था करनी होगी। इसी गांव की एक महिला मतदाता फगुनिया देवी ने कहा कि गांव में मतदान केंद्र देख कर बहुत ख़ुशी हुई । पहले मतदान के इच्छा रखने वालों को 20 किलोमीटर पैदल गांव से दूर जाना पड़ता था। उन्होंने कहा कि कई सुविधाओं के मामले में चोरमारा गांव आज भी बहुत पिछड़ा है । उन्होंने कहा कि इस इलाके में बच्चों की पढाई ले लिए स्कूल खुले और सरकार को खेतों की सिंचाई के लिए पानी का प्रबंध करना चाहिए, ताकि लोगों के जीवन बसर में मदद मिल सके। उन्होंने कहा कि गांव में बिजली की भी व्यवस्था हो।
ज्ञातव्य है कि 2005 से 2017 तक चोरमारा सहित नक्सल प्रभावित इलाकों में नक्सलियों की तूती बोलती थी और इस गांव के रहने वाले बालेश्वर कोड़ा और अर्जुन कोड़ा 'पूर्वी बिहार पूर्वोत्तर झारखंड स्पेशल भाकपा माओवादी संगठन' के हार्डकोर नक्सली कमांडर के रूप में सामने आये थे। इन लोगों ने दो दर्जन से अधिक नागरिकों और सुरक्षा कर्मियों की हत्या की थी । इन दोनों के उपर नक्सली वारदात के कई गंभीर आरोप थे। बाद के दिनों में सरकार के प्रयासों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बाद 2022 में बालेश्वर कोड़ा और अर्जुन कोड़ा ने हथियार रखते हुए आत्मसमर्पण कर दिया था।
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