लखनऊ , दिसम्बर 08 -- शरद ऋतु के आगमन के साथ उत्तर प्रदेश की सभी 10 रामसर साइट्स इन दिनों प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट से गुलजार हो उठी हैं। हजारों किलोमीटर दूर से आने वाली ये दुर्लभ प्रजातियां प्रदेश की वेटलैंड्स में सुरक्षित प्रवास कर रही हैं। प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर ये स्थल पर्यटकों के लिए बड़े आकर्षण का केंद्र बनते जा रहे हैं।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश ईको टूरिज्म विकास बोर्ड लगातार वेटलैंड्स के संरक्षण और पर्यटक सुविधाओं को उन्नत करने की दिशा में काम कर रहा है, ताकि प्रकृति प्रेमियों और बर्ड वॉचर्स को बेहतर अनुभव मिल सके। साथ ही पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाई जा रही है।
उन्होंने बताया कि अब तक दो प्रमुख परियोजनाएं आगरा के सूर सरोवर और मुजफ्फरनगर के हैदरपुर वेटलैंड सफलतापूर्वक विकसित की जा चुकी हैं। सूर सरोवर बर्ड सेंक्चुरी में 167.85 लाख रुपए की लागत से पार्किंग, पाथवे, वॉच टावर, सोविनियर शॉप, साइनजेज और शौचालय जैसी सुविधाओं का विकास किया गया है। यहां आने वाले पर्यटक अब अधिक सुविधाजनक ढंग से पक्षी अवलोकन कर सकते हैं।
इसी प्रकार, हैदरपुर वेटलैंड में 165.71 लाख रुपए की लागत से प्रवेश द्वार, नेचर ट्रेल, नेचर कैंप, वॉच टावर, रिसेप्शन, कैंटीन, गोल हट और बैठने की आधुनिक व्यवस्था विकसित की गई है। इससे यह स्थल पर्यटकों के लिए और भी आकर्षक ईको-टूरिज्म गंतव्य बन गया है।
उन्नाव स्थित नवाबगंज बर्ड सेंक्चुरी में 280.44 लाख रुपए की लागत से अत्याधुनिक एआर-वीआर डोम का निर्माण तेजी से चल रहा है। इसके माध्यम से आगंतुक वेटलैंड की जैव-विविधता और प्रवासी पक्षियों की दुनिया को इमर्सिव तकनीक के साथ अनुभव कर सकेंगे।
जयवीर सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश में कुल 10 रामसर साइट्स हैं। जिनमे नवाबगंज, पार्वती आर्गा, समान, समसपुर, सांडी, सरसई नावर झील, सूर सरोवर, ऊपरी गंगा नदी, बखिरा और हैदरपुर वेटलैंड। ये स्थल न केवल दुर्लभ पक्षियों के बसेरे हैं बल्कि वैश्विक संरक्षण मानकों पर भी महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।
उन्होंने बताया कि देश में सबसे ज्यादा रामसर साइट्स तमिलनाडु में हैं और उत्तर प्रदेश इस मामले में दूसरे नंबर पर है। राज्य सरकार का कहना है कि वेटलैंड्स जैवविविधता संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और दुर्लभ प्रजातियों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती हैं।
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