नयी दिल्ली , जनवरी 14 -- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को मकर संक्रांति और अन्य फसल उत्सवों के पावन अवसर पर देश भर के नागरिकों को बधाई दी ।

प्रधानमंत्री ने सूर्य देव का आह्वान करते हुए सभी के लिए सुख, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना की और भारतीय संस्कृति में इन त्योहारों के महत्व एवं विभिन्न क्षेत्रीय परंपराओं में उनके उल्लासपूर्ण आयोजन पर जोर दिया।

श्री मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "मकर संक्रांति के पावन अवसर पर सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं। भारतीय संस्कृति और परंपराओं में रचे-बसे तिल-गुड़ की मिठास से भरा यह दिव्य क्षण हर किसी के जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता लेकर आए। भगवान सूर्य हम सभी को अपना आशीर्वाद दें।"प्रधानमंत्री ने सूर्य के उत्तरायण और मकर राशि में प्रवेश के अवसर पर मनाए जाने वाले इस पर्व के महत्व को रेखांकित करते हुए लिखा, "सूर्य देव स्वर्ग की ओर अग्रसर हों, भगवान सूर्य मकर राशि में हैं। उत्तरायण में बहुत पुण्य होता है, यह सभी पापों का नाश करता है। सभी को उत्तरायण की शुभकामनाएं।"श्री मोदी ने भारतीय संस्कृति में इन त्योहारों के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि संक्रांति देश के विभिन्न हिस्सों में स्थानीय रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार अलग-अलग रूपों में मनाई जाती है। उन्होंने आगे कहा, "संक्रांति का यह पवित्र अवसर स्थानीय परंपराओं के अनुसार मनाया जाता है। मैं भगवान सूर्य से सभी की खुशी, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करता हूँ।"प्रधानमंत्री ने क्षेत्रीय फसल उत्सव मनाने वाले लोगों को भी शुभकामनाएं दीं। उन्होंने 'माघ बिहू' की बधाई देते हुए कहा, "सभी को माघ बिहू की शुभकामनाएं!" माघ बिहू असम का प्रमुख कृषि उत्सव है, जो संक्रांति के साथ ही आता है और फसल कटाई के मौसम के समापन का प्रतीक है।

मकर संक्रांति का विशेष महत्व है, क्योंकि यह उन कुछ हिंदू त्योहारों में से एक है जो सौर कैलेंडर के अनुसार मनाए जाते हैं। इसे तमिलनाडु में पोंगल, गुजरात में उत्तरायण, असम में माघ बिहू और देश भर में कई अन्य नामों से जाना जाता है। यह त्योहार सर्दियों के अंत, लंबे दिनों की शुरुआत और कृषि उपज के लिए प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का प्रतीक है।

श्री मोदी ने माघ बिहू पर कहा कि यह त्योहार असमिया संस्कृति को दर्शाता है और 'खुशी, गर्मजोशी और भाईचारे' का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि माघ बिहू फसल कटाई के मौसम की समाप्ति का प्रतीक है और कृतज्ञता एवं संतोष को बढ़ावा देता है। इसके साथ ही यह त्योहार किसानों के अमूल्य योगदान को भी स्वीकार करता है। उन्होंने सभी के लिए शांति, अच्छे स्वास्थ्य और सफलता की कामना की।

प्रधानमंत्री ने पोंगल के अवसर पर लोगों को 'वणक्कम' के साथ बधाई दी और इस उत्सव को प्रकृति एवं मनुष्य के बीच के अटूट रिश्ते के रूप में बताया। उन्होंने कहा, "पोंगल कृषि, ग्रामीण जीवन और श्रम की गरिमा का उत्सव मनाता है, जो परिवारों को एक साथ लाता है और सामाजिक बंधनों को मजबूत करता है।"परंपरागत रूप से पवित्र स्नान, पतंगबाजी, भोज और तिल-गुड़ से बनी मिठाइयां बांटने जैसे अनुष्ठानों से जुड़ा यह त्योहार सद्भाव और एकजुटता का संदेश देता है। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और सांस्कृतिक हस्तियों ने भी इस अवसर पर बधाई दी। विभिन्न राज्यों में स्थानीय परंपराओं के अनुसार उत्सव मनाए जा रहे हैं, जो विविधता के बावजूद राष्ट्र को जोड़ने वाले साझा सांस्कृतिक लोकाचार की पुष्टि करते हैं।

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