नयी दिल्ली , नवंबर 8 -- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 11-12 नवंबर को भूटान की राजकीय यात्रा पर जायेंगे और इस दौरान भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक और प्रधानमंत्री महामहिम शेरिंग तोबगे के साथ उच्च स्तरीय बैठकों में पड़ोसी देश के साथ मित्रतापूर्ण संबंधों को और प्रगाढ करेंगे।

विदेश मंत्रालय ने शनिवार को श्री मोदी के भूटान यात्रा कार्यक्रम की जानकारी एक विज्ञप्ति में दी और कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच मित्रता और सहयोग के विशेष संबंधों को मजबूत करना है। यह यात्रा दोनों पक्षों के बीच नियमित उच्च स्तरीय बैठकों की परंपरा के अनुरूप बतायी गयी है।

मंत्रालय ने कहा है, ''प्रधानमंत्री की यह यात्रा दोनों पक्षों को हमारी द्विपक्षीय साझेदारी को और बढ़ाने एवं सुदृढ़ करने के तरीकों पर विचार-विमर्श करने, तथा आपसी हित के क्षेत्रीय एवं व्यापक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करने का अवसर प्रदान करेगी।"प्रधानमंत्री इस यात्रा में भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक से मुलाकात करेंगे और उनके साथ भारत और भूटान की सरकारों द्वारा संयुक्त रूप से विकसित 1020 मेगावाट की पुनात्सांगछू-दो जलविद्युत परियोजना का उद्घाटन करेंगे।

प्रधानमंत्री श्री मोदी भूटान के चौथे राजा महामहिम जिग्मे सिंग्ये वांगचुक की 70वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में शामिल होंगे और भूटान के प्रधानमंत्री महामहिम शेरिंग तोबगे से भी मुलाकात करेंगे।

प्रधानमंत्री की यह यात्रा ऐसे समय हो रही जब भारत से भूटान भेजे गए भगवान बुद्ध के पवित्र पिपराहवा अवशेषों की वहां प्रदर्शनी चल रही है। प्रधानमंत्री राजधानी थिम्पू के ताशिछोद्ज़ोंग में पवित्र अवशेषों की पूजा-अर्चना करेंगे और भूटान की शाही सरकार द्वारा आयोजित वैश्विक शांति प्रार्थना महोत्सव में भी भाग लेंगे।

विदेश मंत्रालय का कहना है कि भारत और भूटान के बीच एक अद्वितीय और अनुकरणीय साझेदारी है जो एक-दूसरे के प्रति गहरे आपसी विश्वास, सद्भावना और सम्मान पर आधारित है। दोनों देशों की साझा आध्यात्मिक विरासत और लोगों के बीच मधुर संबंध भारत-भूटान विशेष साझेदारी की पहचान हैं।

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