पटना , मार्च 30 -- बिहार में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान रहने का कीर्तिमान बनाने वाले नीतीश कुमार का पहला कार्यकाल महज सात दिनों का था और उस समय वह प्रदेश के किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे।

श्री कुमार के राज्यसभा के लिए चुने जाने और बिहार विधानपरिषद से इस्तीफे के बाद बिहार की राजनीति एक युगांतकारी परिवर्तन के दौर में प्रवेश कर चुकी है। इस बात की अटकलें तेज हो गई हैं कि शीघ्र ही श्री कुमार मुख्यमंत्री का पद भी छोड़ देंगे और लम्बे अरसे के बाद बिहार में नेतृत्व परिवर्तन होगा।

नीतीश कुमार को जब 3 मार्च 2000 को पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई, तब वह न तो बिहार विधानसभा और न ही विधान परिषद के सदस्य थे और यह कुर्सी भी उन्हें महज सात दिनों के लिए ही नसीब हो पाई थी, लेकिन श्री कुमार पांच साल बाद उसी कुर्सी पर लौटे और इस बार उनका जोड़ इतना मजबूत था कि अगले बीस वर्षों तक ( जीतनराम मांझी के 09 महीनों को छोड़ कर) राजनीति के हर बनते और बिगड़ते समीकरण के बीच मुख्यमंत्री की कुर्सी उन्ही के पास रही। मुख्यमंत्री बनने के बाद श्री कुमार ने दिखाया कि अपराध के चंगुल में फँसी तथा जाति और सामाजिक न्याय के जाल में उलझी तेजी से गिरती हुई प्रदेश की अर्थव्यवस्था को कैसे पटरी पर लाया जा सकता है। नीतीश की इसी क़ाबलियत ने उन्हें सुशासन बाबू जैसा नाम दिया और लोगों ने कहा, " बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार है।"श्री कुमार पहली बार मुख्यमंत्री बनने से पहले 13वीं लोकसभा के सदस्य और केंद्रीय मंत्री थे और उन्होंने मंत्रिमंडल से इस्तीफा देकर इस पद को सुशोभित किया था। उस समय राज्य विधानसभा चुनाव के बाद त्रिशंकु स्थिति बनी थी। एनडीए और उसके सहयोगियों के पास 151 विधायक थे, जबकि लालू प्रसाद यादव के पास 324 सदस्यीय सदन में 159 विधायक थे। दोनों गठबंधन बहुमत के आंकड़े 163 से कम थे।

उस समय केंद्र में प्रधानमंत्री पद पर विराजमान प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी की इच्छा थी कि नीतीश कुमार को बिहार का मुख्यमंत्री बनाया जाये। नीतीश कुमार 03 मार्च'2000 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद 10 मार्च तक पद इस पर रहे। उनकी सरकार सदन में बहुमत साबित नहीं कर सकी और उसी वर्ष 27 मई को वह फिर से केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हो गए।

बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार पहली बार 3 मार्च 2000 से 10 मार्च 2000 तक, दूसरी (24 नवंबर 2005 से 26 नवंबर 2010), तीसरी बार (26 नवंबर 2010- 17 मई 2014), चौथी बार (22 फरवरी 2015 से 20 नवंबर 2015), पांचवी बार (20 नवंबर 2015 से 26 जुलाई 2017), छठी बार (27 जुलाई 2017 से 16 नवंबर 2020), सातवीं बार(16 नवंबर 2020 से 09 अगस्त 2022),आठवीं बार (10 अगस्त 2022 से 28 जनवरी 2024), नवीं बार (28 जनवरी 2024 से 19 नवम्बर 2025) और दसवीं बार(20 नवंबर 2025 से वर्तमान) तक मुख्यमंत्री पद पर सुशोभित हुए।

श्री कुमार ने दूसरी बार 24 नवंबर 2005 को भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन सरकार का नेतृत्व करते हुए मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इससे पहले फरवरी 2005 के विधानसभा चुनाव में त्रिशंकु विधानसभा और राजनीतिक कारणों से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार नहीं बन सकी और राष्ट्रपति शासन के बाद पुनः चुनाव हुए, जिसमे राजग को स्पस्ट बहुमत मिला।

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