लखनऊ , जनवरी 1 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाकर बड़ा संगठनात्मक दांव खेला है। पार्टी सूत्रों और राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह नियुक्ति 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को हुए नुकसान के बाद 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर की गई है, लेकिन पंकज चौधरी के सामने राह आसान नहीं मानी जा रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा-नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को बड़ा झटका लगा। 2019 में जहां गठबंधन ने 64 सीटें जीती थीं, वहीं 2024 में यह आंकड़ा घटकर 36 पर सिमट गया। माना जा रहा है कि ओबीसी मतदाताओं, खासकर कुर्मी समाज के एक बड़े हिस्से के पार्टी से दूर होने का असर चुनाव नतीजों में दिखा।

पंकज चौधरी की नियुक्ति को ओबीसी कार्ड के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि कुर्मी समाज से आने वाले वरिष्ठ नेता के तौर पर चौधरी न सिर्फ सामाजिक संतुलन साधेंगे, बल्कि ओबीसी मतदाताओं के बीच भरोसा दोबारा कायम करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनकी पहली मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई। इस तस्वीर को संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल के संदेश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि पार्टी के भीतर यह भी माना जा रहा है कि केवल प्रतीकात्मक संदेश से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर समन्वय को मजबूत करना सबसे बड़ी चुनौती होगी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पंकज चौधरी के सामने संगठन को फिर से सक्रिय करना, बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को जोड़ना और विभिन्न सामाजिक वर्गों विशेषकर ब्राह्मण और ठाकुर नेताओं के बीच संतुलन बनाए रखना बड़ी जिम्मेदारी होगी। हाल ही में कुशीनगर के विधायक पीएन पाठक से जुड़ा विवाद और उस पर प्रदेश अध्यक्ष की सख्त प्रतिक्रिया को संगठन में अनुशासन का संकेत माना जा रहा है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, पंकज चौधरी जल्द ही अपनी नई संगठनात्मक टीम का गठन कर सकते हैं। नामों पर मंथन शुरू हो चुका है और उम्मीद है कि विधानसभा चुनाव से पहले संगठन में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भले ही पंकज चौधरी को राष्ट्रीय नेतृत्व का समर्थन प्राप्त हो, लेकिन संगठनात्मक राजनीति में वे नए हैं। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को एकजुट रखना और विभिन्न गुटों के बीच संतुलन साधना उनके लिए सबसे बड़ी परीक्षा होगी।

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