लखनऊ , नवम्बर 5 -- कार्तिक पूर्णिमा और प्रकाश पर्व के पावन अवसर पर बुधवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) लखनऊ विभाग द्वारा राजधानी में भव्य कौमुदी घोष संचलन आयोजित किया गया। संचलन में संघ के पूर्ण गणवेशधारी स्वयंसेवकों ने विविध वाद्य यंत्रों के साथ घोष वादन करते हुए अपनी अनुशासित और सांस्कृतिक परंपरा का परिचय दिया।

संचलन का शुभारंभ लालबाग स्थित नगर निगम पार्क से हुआ। वाद्य यंत्रों की मधुर धुनों के बीच घोष वादक दल नगर निगम कार्यालय के सामने से होते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश कार्यालय तक पहुँचा। इसके बाद संचलन अटल चौहारा (हजरतगंज) से होते हुए मेफेयर चौराहा पहुँचा और आगे बढ़ते हुए गुरूद्वारा श्री गुरु सिंह सभा तक पहुँचा।

गुरूद्वारा के सामने स्वयंसेवकों ने "शिवरंजनी" और "जन्मभूमि" की रचनाओं का वादन कर सभी का मन मोह लिया। यहां उपस्थित नागरिकों और श्रद्धालुओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन किया। इसके पश्चात संचलन शर्मा टी स्टाल मार्ग से होते हुए नगर निगम पार्क वापस लौटा, जहाँ कार्यक्रम का समापन हुआ।

संचलन में सबसे आगे घोष दण्ड दल, उसके पीछे आनक दल, फिर प्रणव दल, और क्रमशः बिगुल, झल्लरी, वंशी तथा वेणु दल वाद्य यंत्र बजाते हुए अनुशासित रूप से आगे बढ़ते रहे। स्वयंसेवकों ने संचलन के दौरान भूप, मीरा, तिलंग, शिवरंजनी, जन्मभूमि और ध्वजारोपणम जैसी रचनाओं का वादन किया, जबकि शंखवादन में किरण, उदय, श्रीराम, गायत्री और ध्वजावतरणम की धुनें प्रस्तुत की गईं।

लखनऊ विभाग के विभाग कार्यवाह अमितेश ने बताया कि "कौमुदी संचलन की विशेषता यह है कि यह सदैव रात्रि में आयोजित किया जाता है, जब पूर्णिमा की चांदनी में घोष वादन का प्रभाव और अधिक भव्य प्रतीत होता है।" उन्होंने बताया कि संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में इस वर्ष विजयादशमी के अवसर पर लखनऊ में 400 से अधिक स्थानों पर पथ संचलन आयोजित किए गए थे।

इस अवसर पर विभाग प्रचारक अनिल, विभाग सह शारीरिक प्रमुख अतुल सिंह, बृजनंदन राजू और विभाग विद्यार्थी कार्य प्रमुख शिवा सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवक एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। पूरे संचलन के दौरान घोष वादन, अनुशासन और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला।

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