अलवर , नवम्बर 11 -- राजस्थान के अलवर में इन दिनों प्याज के भाव काफी कम रहने से किसानों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

हालत यह है कि जो प्याज कभी किसानों की कर्ज मुक्ति का माध्यम बनती थी, इस वर्ष इसके भाव नहीं मिलने से किसान कर्ज में डूब गये हैं। प्याज के भाव तीन रुपये से लेकर 10 रुपये किलो तक मिल रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार इसके कारण अलवर जिले में प्याज की खेती करने वाले किसानों को करीब 400 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। दरअसल प्याज विदेशों में निर्यात की जाती थी, तब किसानों को अच्छे भाव मिल जाते थे, लेकिन अंतरराष्ट्रीय नीति में आये बदलाव के चलते कुछ देशों में प्याज नहीं जा रही है। इससे देशभर में प्याज की अधिकता के चलते इसके भाव गिर गये और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

सूत्रों ने बताया कि किसान अपनी प्याज की फसल को खेतों में ही जोत रहा है, क्योंकि प्याज बाजारों में तीन रुपये से लेकर 10 रुपये किलोग्राम तक ही बिक रही है। तीन रुपये किलो के हिसाब बेचने पर वाहन का भाड़ा भी नहीं निकल पा रहा है। ऐसे में किसान प्याज को अलवर की मंडी में नहीं ला रहा है। तीन बार से किसान प्याज सड़कों पर फेंक चुका है, नदियों में बहा चुका है क्योंकि उसकी लागत बिल्कुल नहीं निकल रही है। दरअसल किसान को एक बीघा प्याज को तैयार करने में करीब 40 से 50 हजार रुपये की लागत आती है, लेकिन इन दिनों करीब 10 से 15 हजार रुपये बीघा की प्याज बिक रही है, पिछले वर्ष प्याज के मुकाबले इस वर्ष किसानों को चौथाई दाम भी नहीं मिल रहे हैं।

प्याज मंडी के प्रमुख व्यापारी पप्पू भाई ने बताया कि सब्जी में प्याज मंडी में करीब 20 से 25 हजार कट्टे आवक शुरू हुई है और ज्यादातर प्याज तीन रुपये से लेकर सात रुपये किलो तक में बिक रहा है। वैसे 10 रुपये किलोग्राम तक के भी भाव हैं। इस प्याज का ज्यादा समय तक भंडारण नहीं किया जा सकता, क्योंकि इस प्याज में नमी रहती है। हां सरकार अगर कोई व्यवस्था करें तो चार-पांच दिन तक किसान उसे प्याज को मंडी में रख सकता है क्योंकि अब किसानों को रोज ही प्याज बेचकर जानी पड़ रही है।

उन्होंने बताया कि मंडी में प्याज को दो-तीन दिन तक रखने की ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। अलवर की प्याज पहले भारत के 16 राज्य और पाकिस्तान, बर्मा, नेपाल, भूटान एवं बंगलादेश में जाती थी। पाकिस्तान में तो लम्बे समय से प्याज नहीं जा रही, लेकिन इस बार बंगलादेश में भी प्याज नहीं जा रही है। जो बड़े व्यापारी और निर्यातक हैं, वह बताते हैं कि भारत से संबंध सही नहीं होने के कारण प्याज प्याज दूसरे देशों में नहीं जा रही है। इसके चलते किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। अगर पिछले वर्ष की तुलना इस वर्ष से करें तो करीब 400 से 500 करोड रुपए का किसानों को नुकसान हो रहा है।

रामगढ़ के नाड़का गांव निवासी प्याज उत्पादक नवाब खान बताया कि इन दिनों प्याज की लागत भी नहीं निकल पा रही है। जहां एक बीघा में 100 कट्टे प्याज होते थे अब 20 से 25 कट्टे ही प्याज हो रहे हैं। प्याज में इन दिनों रोग भी लगा है जिससे प्याज खराब हुई है। उत्पादन पर प्रभाव पड़ा है और प्याज की गुणवत्ता भी बहुत गिर गयी है। किसान मुबारक खान बताया कि सरकार को किसानों की सहायता करनी चाहिए। इनको संगठन बनाकर सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन करना चाहिए, जिससे सरकार किसानों की सुने और यह डबल इंजन की सरकार है, ऐसे में किसान भी परेशान हो रहे हैं। उन्होंने कहा की लागत बिल्कुल नहीं निकल रही है और किसान आर्थिक दृष्टि से काफी संकट में है। पिछली फसल के दाम अच्छे मिलने से किसानों ने इस बार फसल काफी बोई थी ,लेकिन रोग के कारण फसल की गुणवत्ता खराब होने से प्याज के दाम नहीं मिल पा रहे हैं। कम से कम किसानों का प्याज 30 से 35 रुपये किलो बिकना चाहिए जिससे कम से कम उनकी लागत तो निकल आये।

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