चेन्नई , जनवरी 15 -- दक्षिणी तमिलनाडु में सालाना पोंगल उत्सव से जुड़ा पारंपरिक जल्लीकट्टू कार्यक्रम( बैलों को काबू करना) गुरुवार को मदुरै जिले के अवुनियापुरम में शुरू हुआ।
यह कार्यक्रम शुक्रवार को मदुरै के पालामेडु और तमिलनाडु के त्रिची जिले के सूरियूर गांव में होगा और अलंगनल्लूर में 17 जनवरी को होगा, जिसका उद्घाटन मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन करेंगे। इस अवसर पर देश और विदेश से हजारों पर्यटक अलंगनल्लूर कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे।
इस कार्यक्रम के दौरान बैलों को वाडीवासल से छोड़ा जाएगा, जिसमें सैकड़ों लोग बैलों को काबू करने वाले इस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे और सोने की अंगूठी, चेन, कार्ड, दोपहिया वाहन और स्टेनलेस स्टील के बर्तनों जैसे कई पुरस्कार जीतेंगे। इसके बाद बैल को काबू करने वाले विजेताओं को सम्मानित किया जायगा।
तमिलनाडु के मंत्री पी. मूर्ति ने मदुरै जिला कलेक्टर की मौजूदगी में कार्यक्रम को हरी झंडी दिखाई और जैसे ही बैलों को वाडीवासल से खुले मैदान में छोड़ा गया उत्साही काबू करने वालों ने जानवरों को काबू करने के लिए अपनी ताकत दिखाई। इसके बाद पालामेडु और अलंगनल्लूर में भी ऐसा ही किया जाएगा।
बहुत पुराने समय से जल्लीकट्टू देश के अलग-अलग हिस्सों और विदेश से भी हजारों लोगों को आकर्षित करता है और यह तमिलनाडु में चार दिवसीय फसल उत्सव - पोंगल का पर्याय है। बहादुरी के इस खेल के लिए मवेशियों की एक खास नस्ल पाली जाती है और युवा इसे काबू करके अपनी हिम्मत दिखाते हैं। हर साल अलंगनल्लूर, अविनायपुरम और पालेमेडु पंचायत शहरों को इस सालाना खेल के लिए खूबसूरती से सजाया जाता है, जो युवाओं की वीरता, शौर्य और साहस का प्रतीक है।
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