रांची , जनवरी 05 -- झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने केंद्रीय कार्यालय में प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि पेसा नियमावली लागू होने से वनोपज की लूट करने वाले तथा बालू-गिट्टी के माफिया तत्वों की आर्थिक रीढ़ टूटने वाली है, जिनका भाजपा प्रतिनिधित्व करती रही है। अब ऐसे तत्वों को गंभीर मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।
श्री भट्टाचार्य कहा है कि पेसा नियमावली बनाकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने ग्रामीणों और आदिवासियों को शोषण एवं दोहन से मुक्ति दिलाने का ऐतिहासिक काम किया है। इससे भाजपा की आदिवासी विरोधी राजनीति पूरी तरह नेस्तनाबूत हो गई है।
श्री भट्टाचार्य ने कहा कि पेसा नियमावली पर भाजपा के वे नेता सवाल उठा रहे हैं, जो केंद्र सरकार में जनजातीय मामलों के मंत्री रहे, तीन बार मुख्यमंत्री बने, लेकिन अपने पूरे कार्यकाल में पेसा को लागू करने के लिए कोई ठोस काम नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इनका एकमात्र एजेंडा अपनी जाति पातर मुंडा को एसटी सूची में शामिल कराना था।
श्री भट्टाचार्य ने सवाल उठाया कि पेसा नियमावली पर आज कोई भी मांझी, मानकी, मुंडा, डोकलो या सोहोर जैसे परंपरागत ग्राम प्रधान विरोध क्यों नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केवल भाजपा को ही इस नियमावली से तकलीफ हो रही है, जो अपने आप में बहुत कुछ स्पष्ट करता है।
श्री भट्टाचार्य ने भाजपा शासनकाल की आलोचना करते हुए कहा कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल (टीएसी) का अध्यक्ष गैर-आदिवासी रहा। पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के कार्यकाल में डोमेसाइल नीति को लेकर अराजकता फैलाई गई और तपकरा कांड जैसी घटनाएं हुईं, जहां आदिवासियों पर गोली चलाई गई।
श्री भट्टाचार्य ने कहा कि भाजपा को यह बताना चाहिए कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा जैसे भाजपा शासित राज्यों में पेसा को लेकर क्या प्रावधान हैं। उन्होंने कहा कि अब ग्राम सभा अपनी नीतियां स्वयं बनाएगी, किसी दबाव में माइनिंग लीज नहीं दी जा सकेगी और जंगलों की कटाई व केंदू पत्ता लूटने वाली माफियागिरी पर रोक लगेगी।
श्री भट्टाचार्य ने दावा किया कि पेसा नियमावली के लागू होने से गांवों में शोषण की परंपरा समाप्त होगी। अब 10 किलो महुआ के बदले एक किलो सरसों तेल या पांच किलो मड़ुआ के बदले एक किलो चीनी देने जैसी शोषणकारी व्यवस्था खत्म होगी। हेमंत सोरेन की सरकार ने शोषण मुक्त गांव की दिशा में निर्णायक कदम उठाया है।
अखिल भारतीय सेवा की अधिकारी निशा उरांव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि यह ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट से जुड़ा मामला है और प्रशासन को इस पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
वहीं श्री भट्टाचार्य ने कहा कि सीजीएल परीक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय भाजपा के तथाकथित बुद्धिजीवी मंच के गाल पर करारा तमाचा है। उन्होंने दावा किया कि अब भाजपा के सभी राजनीतिक हथकंडे विफल हो चुके हैं और वर्ष 2026 में उसका राजनीतिक खेल समाप्त हो जाएगा।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित