रांची , जनवरी 13 -- झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा पेसा नियमावली लागू नहीं किए जाने के मामले में दाखिल अवमानना याचिका पर सुनवाई के बाद उसे निष्पादित कर दिया है।

इसके साथ ही अदालत ने बालू और अन्य लघु खनिजों के आवंटन एवं लीज प्रक्रिया पर लगी रोक भी हटा दी है। हाईकोर्ट के इस फैसले को राज्य में खनन और निर्माण क्षेत्र के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।

ज्ञातव्य है कि हाईकोर्ट ने 29 जुलाई 2024 को राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया था कि वह दो माह के भीतर पेसा नियमावली को लागू करे। निर्धारित समय सीमा में निर्देश का पालन नहीं होने पर इस मामले में अवमानना याचिका दाखिल की गई थी। पिछली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया था कि पेसा नियमावली का मसौदा तैयार कर लिया गया है और कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा।

मंगलवार को झारखंड हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब राज्य में बालू घाटों की नीलामी के बाद उसके अलॉटमेंट का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है. इस संबंध में आदिवासी बुद्धिजीवी मंच की ओर से अवमानना याचिका दायर की गई थी. हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश की खंडपीठ में इस अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई. राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने पक्ष रखा। वहीं प्रार्थियों की ओर से वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार ने बहस की। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को अवगत कराया कि पेसा नियमावली को लागू कर दिया गया है। इस पर संतोष व्यक्त करते हुए कोर्ट ने अवमानना याचिका को निष्पादित कर दिया और बालू व लघु खनिजों के आवंटन पर लगी रोक को समाप्त करने का आदेश दिया।

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने पंचायती राज सचिव के खिलाफ चल रहे अवमानना मामले को भी समाप्त कर दिया।

कोर्ट के इस आदेश के बाद झारखंड में कैटेगरी-2 बालू घाटों की लीज प्रक्रिया को दोबारा गति मिलने का रास्ता साफ हो गया है। पिछले कई महीनों से हाईकोर्ट के आदेश के कारण राज्य में बालू लीज प्रक्रिया ठप पड़ी थी, जिससे निर्माण कार्यों पर भी असर पड़ा था।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब न केवल बालू घाटों की नीलामी और आवंटन प्रक्रिया फिर से शुरू हो सकेगी।

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