नयी दिल्ली , मार्च 30 -- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सोमवार को लोकसभा में कहा कि कर्मचारी पेंशन निधि के तहत पेंशन पाने वाले कर्मचारियों की पेंशन बढ़ाने पर सरकार संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है।
श्रीमती सीतारमण लोक सभा में एक पूरक प्रश्न के जवाब में कहा कि इस योजना के तहत पेंशन बहुत कम है और इस मामले में उनसे बराबर प्रतिनिधिमंडल मिलने भी आते हैं। उन्हें इस मामले की पूरी जानकारी है और इस पर सरकार गंभीरता से तथा संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है।
उंन्होंने कहा कि पेंशन कंट्रीब्यूशन के आधार पर तय की जा रही है। उन्होंने इसे अत्यंत संवेदनशील मुद्दा बताया और कहा कि इस संबंध में उनसे कई लोग मिल चुके हैं। उनका मनाना है कि वृद्धावस्था में सबको पेंशन मिलनी चाहिए और राशि भी ठीक मिलनी चाहिए लेकिन राशि का निर्धारण तकनीकी आधार पर होता है और जो पैसा आ रहा है वह ज्यादा पेंशन देने के लिए अभी पर्याप्त नहीं है। अभी जो पैसा है उसके हिसाब से 10000 देना भी संभव नहीं हो रहा है।
उन्होंने कहा कि इस बारे में चर्चा चल रही है और इसमें समय लग रहा है क्योंकि धर्म संकट यह है कि जो राशि अर्जित हो रही है वह पर्याप्त नहीं है। इस पर विचार चल रहा है और सब स्थितियों को देखने परखने के बाद इस बारे में निर्णय लिया जाएगा।
श्रम राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे इससे जुड़े एक सवाल पर कहा कि असंगठित क्षेत्र में पेंशन की फिलहाल कोई योजना नहीं है। यह पेंशन योजना कर्मचारी और नियोक्ता के कंट्रीब्यूशन से चलती है। हालांकि सरकार चाहती है कि देश में हर कामगार को पेंशन मिलनी चाहिए और सबके हित में सबको ईपीएफओ के दायरे में लाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार पेंशन बढ़ाने पर गम्भीरता से विचार कर रही है लेकिन अभी इसका सेलिंग रेट 15000 रुपये है।
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