अगरतला , जनवरी 02 -- त्रिपुरा के कृषि क्षेत्र के लिए नये साल की शुरुआत एक बड़ी उपलब्धि के साथ हुई है। राज्य के कृषि विभाग ने शुक्रवार को 'उत्तर पूर्वी क्षेत्र मिशन जैविक मूल्य श्रृंखला विकास' के तहत 1000 किलोग्राम जैविक सफेद तिल की पहली खेप गुजरात भेजी।
त्रिपुरा के धलाई जिले के दो किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के तैयार इस जैविक तिल की आपूर्ति गुजरात में अमूल की सहायक इकाई को की गयी है। कृषि मंत्री रतन लाल नाथ ने इस खेप को रवाना करते हुए कहा कि यह सफलता राष्ट्रीय स्तर पर त्रिपुरा के जैविक उत्पादों की बढ़ती साख का प्रमाण है।
कृषि मंत्री ने इस कदम को महज एक व्यापारिक सौदा न मानकर राज्य की जैविक खेती के लिए एक नये युग की शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वर्ष 2026 तक अपनी जैविक विपणन रणनीतियों को और अधिक सुदृढ़ करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। सरकार का लक्ष्य है कि किसानों को सीधे बड़े बाजारों से जोड़ा जाये, ताकि उनकी पहुंच न केवल राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर हो, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उनके उत्पादों को पहचान मिल सके।
श्री नाथ ने वर्ष 2026 को नयी संभावनाओं का साल बताते हुए इस सफलता के लिए किसानों, एफपीओ और संबंधित सरकारी विभागों के आपसी तालमेल की सराहना की। इस पूरी प्रक्रिया में गुणवत्ता मानकों और प्रमाणीकरण को सुनिश्चित करने के लिए 'इंटरनेशनल कॉम्पिटेंस सेंटर फॉर ऑर्गेनिक एग्रीकल्चर' और 'शील बायोटेक' जैसी संस्थाओं ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कृषि मंत्री ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में बेहतर वैल्यू चेन और सतत विकास के माध्यम से त्रिपुरा के किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि सरकार जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए हर संभव तकनीकी और बाजार सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे भविष्य में कृषि क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
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