नयी दिल्ली , अक्टूबर 30 -- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि पूर्वोत्तर की जैव-क्षमता भारत के आर्थिक उत्थान की संभावनाएं जगाती है।

केंद्रीय मंत्री ने यह बात सीएसआईआर-एनईआईएसटी द्वारा आयोजित सीएसआईआर-अरोमा मिशन और सीएसआईआर-फ्लोरिकल्चर मिशन के अंतर्गत "हितधारक-सह-जागरूकता सम्मेलन" और गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री के वितरण समारोह में कही। वह वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के उपाध्यक्ष भी हैं।

डॉ. सिंह ने कहा कि ग्रामीण आजीविका के उत्थान और पूर्वोत्तर क्षेत्र में सतत आर्थिक विकास को गति देने में विज्ञान का उपयोग परिवर्तनकारी भूमिका अदा कर रहा है। उन्होंने औषधीय, सुगंधित और पुष्प फसलों की खेती के माध्यम से किसानों, उद्यमियों और युवाओं को सशक्त बनाने में सीएसआईआर-एनईआईएसटी के प्रयासों की भी सराहना की।

डॉ. सिंह ने इस बात पर भी जोर दिया कि समृद्ध जैव विविधता और अद्वितीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों से संपन्न पूर्वोत्तर में उच्च मूल्य वाले पौध-आधारित उद्योगों के केंद्र के रूप में उभरने की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों को पारंपरिक कृषि पद्धतियों के साथ एकीकृत करके इस क्षेत्र को "कृषि-उद्यमिता केंद्र" में बदलने के लिए प्रतिबद्ध है।

केंद्रीय मंत्री ने जम्मू और कश्मीर में 'बैंगनी क्रांति' की सफलता का उल्लेख करते हुये मिज़ोरम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के किसानों और उद्यमियों से लैवेंडर, सिट्रोनेला, लेमनग्रास और पचौली जैसी सुगंधित फसलों की खेती के लिए इस मॉडल का अनुकरण करने का आग्रह किया, जिनकी बाजार में उच्च मांग और आय क्षमता में बढ़ोतरी हुई है।

डॉ. सिंह ने कहा कि सीएसआईआर-अरोमा मिशन और सीएसआईआर-पुष्पकृषि मिशन के तहत पहल न केवल कृषि आय बढ़ाती हैं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, युवा जुड़ाव और ग्रामीण औद्योगीकरण को भी बढ़ावा देती हैं, जिससे सरकार के 'विकसित भारत 2047' के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता सीएसआईआर-एनईआईएसटी, जोरहाट के निदेशक डॉ. वीरेंद्र एम. तिवारी ने की। उन्होंने मिज़ोरम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में संस्थान के हस्तक्षेपों और उपलब्धियों पर विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर किसानों को लेमनग्रास, सिट्रोनेला, कैमोमाइल, पचौली, एंथुरियम, गेंदा और गुलदाउदी जैसी सुगंधित और पुष्पीय फसलों की गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री के साथ-साथ मधुमक्खी पालन के बक्से भी वितरित किए गए।

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