नयी दिल्ली , दिसंबर 12 -- केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के राममोहन नायडू ने लोकसभा में शुक्रवार को बताया कि पूरे साल हवाई किराये को नियंत्रित नहीं किया जा सकता और त्योहारों के दौरान कीमतें बढ़ जाती हैं।
श्री नायडू ने शुक्रवार को हवाई किराए को नियंत्रित करने की मांग से जुड़े एक प्राइवेट मेंबर संकल्प पर चर्चा के जवाब में कहा सरकार के लिए पूरे देश में हवाई किराये पर सीमा लगाना व्यावहारिक नहीं होगा। उन्होंने कहा कि एक अनियंत्रित बाजार आखिर में उपभोक्ताओं को ही लाभ पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र को विकसित होने देने के लिए नियंत्रण पर से ढील दी गई थी।
उन्होंने कहा कि जिन देशों ने असाधारण वृद्धि देखी है, उन सभी ने बाजारों को अनियंत्रित रखा है। उन्होंने कहा कि इससे ज्यादा कंपनियों को क्षेत्र में आने का प्रोत्साहन मिलता है और सहयोग के दरवाजे खुलते हैं। उन्होंने कहा, 'इसके चलते बाजार की गतिशीलता को स्वाभाविक रूप से काम करने की इजाजत मिलती है, जिससे मांग और आपूर्ति अपनी स्वाभाविक भूमिका निभा पाती हैं। आखिरकार इसका सबसे ज्यादा फायदा यात्रियों को ही मिलता है।"उन्होंने कहा "अगर हम नागरिक उड्डयन क्षेत्र को विकसित करना चाहते हैं, तो सबसे पहली और जरूरी आवश्यकता इसे नियंत्रण से मुक्त रखना है ताकि बाजार में और कंपनियां आ सकें।" उन्होंने कहा कि जब डी-रेगुलेशन की नीति लाई गई थी, तो उसका मूल विचार यही था कि इस सेक्टर को तेजी से बढ़ने दिया जाए। दुनिया के जिन देशों में हवाई यातायात ने असाधारण वृद्धि की है, उन सभी ने अपना बाजार डी-रेगुलेटेड रखा है। इससे ज्यादा से ज्यादा लोग बाजार में आते हैं, आपसी सहयोग बढ़ता है और बाजार के डायनैमिक्स को पूरी तरह काम करने की आजादी मिलती है। मांग और सप्लाई प्राकृतिक नियम से चलते है, जिससे अंत में सबसे अधिक फायदा यात्री को ही होता है।
केंद्रीय मंत्री के जवाब के बाद संकल्प पेश करने वाले कांग्रेस के शफी परम्बिल ने अपना संकल्प वापस लेने का आग्रह किया जिसे सदन ने ध्वनिमत से पारित कर दिया।
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