पन्ना , अक्टूबर 28 -- मध्यप्रदेश पुलिस की साख हिला देने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। पन्ना जिले के एक कुख्यात अपराधी ने न केवल कानून की धज्जियां उड़ाईं, बल्कि पुलिस की ईमानदारी भी 1 लाख रुपये में खरीद ली। जिसका एक ऑडियो रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हैरत की बात यह है कि पुलिस पर हमले और रायफलें लूटे जाने जैसे गंभीर अपराध के बावजूद अब तक स्थानीय पुलिस की तरफ से किसी भी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई है और अपराधी फरार है।

जानकारी के अनुसार वर्ष 2025 में पन्ना जिले के ब्रिजपुर थाने में एक पुराने अपराधी के विरुद्ध नया प्रकरण दर्ज हुआ था। सूत्र कहते है कि आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए सीधे एसडीओपी अजयगढ़ राजीव सिंह भदौरिया से संपर्क किया और कथित रूप से Rs.1 लाख की नकद रिश्वत देकर मामला रफा-दफा करा लिया। एसडीओपी भदौरिया ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर अवैध रूप से जांच अपने हाथ में ली और गंभीर धाराओं को हटा दिया। इस कृत्य ने न केवल पुलिस वर्दी की गरिमा को कलंकित किया, बल्कि पूरे तंत्र की नैतिक नींव को भी हिला दिया।

वहीं दूसरी ओर, बृजपुर थाना प्रभारी ने इस अवैध हस्तक्षेप को दर्ज कर इसकी जानकारी एसपी पन्ना को दी। एसपी ने जिले के डीपीओ से विधिक राय ली, जिसमें पुष्टि हुई कि आरोपी के विरुद्ध धारा 105 के अंतर्गत कार्रवाई उचित है। इसके बाद एसपी ने आरोपी की गिरफ्तारी के निर्देश दिए और 20 सितम्बर 2025 को उसे घोषित अपराधी (प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर) घोषित कर Rs.10 हजार का इनाम घोषित किया।

वही 22 अक्टूबर 2025 को आरोपी की गिरफ्तारी के लिए विशेष पुलिस दल गठित किया गया। गिरफ्तारी के बाद लौटते समय आरोपी के परिजनों सहित गाँव के कुछ लोगों ने पुलिस दल पर हमला कर दिया। इस हमले में थाना प्रभारी महेन्द्र सिंह भदौरिया सहित आरक्षक रामनिरंजन कुशवाह को गंभीर चोटें आईं और उनके सिर पर 31 से अधिक टांके लगे। हमलावरों ने पुलिस की सर्विस रायफलें भी लूट लीं, जो राज्य की कानून-व्यवस्था के लिए खुली चुनौती है।

हमले के बाद से अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। वही लोगों का कहना है कि पुलिस की कार्रवाई महज दिखावे तक सीमित रही। सवाल उठता है कि क्या अब पुलिस अपने ही जवानों की सुरक्षा नहीं कर पा रही?इस पूरे मामले में एक ऑडियो रिकॉर्डिंग (यूनिवार्ता इस ऑडियो रिकॉर्डिंग की सत्यता की पुष्टि नहीं करता) सामने आई है, जिसमें आरोपी के भाई शान यादव को यह स्वीकार करते सुना जा सकता है कि एसडीओपी राजीव सिंह भदौरिया ने Rs.1 लाख रिश्वत ली थी। रिकॉर्डिंग से यह भी स्पष्ट होता है कि मामला इसलिए नहीं दब सका क्योंकि तत्कालीन टीआई और एसपी ने ईमानदारी से अपना दायित्व निभाया। सूत्रों के अनुसार अब एसडीओपी भदौरिया हमलावरों के परिवार विशेषकर महिलाओं को झूठे प्रकरण दर्ज कराने की सलाह दे रहे हैं ताकि सच्चाई को पलट दिया जाए।

सुप्रिम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट में कार्य करने वाले एडवोकेट रवि प्रताप सिंह ने बताया कि उनके द्वारा यह ऑडियो साक्ष्य मध्यप्रदेश के डीजीपी, सागर रेंज के आईजी और एसपी पन्ना को उनके सीयूजी नंबरों पर भिजवाया जा चुका है। वही यूनिवार्ता ने पन्ना एसपी निवेदिता नायडू से इस विषय में जानकारी चाही और वायरल ऑडियो उपलब्ध करवाकर उनसे उनका अधिकृत बयान जानना चाहा, लेकिन उन्होंने कोई जबाब नहीं दिया। जबकि घटना में घायल थाना प्रभारी महेंद्र सिंह भदौरिया का कहना है कि इस पूरे मामले को राजनीतिक और जातिगत रंग दिया जा रहा है जबकि वह तो शासकीय कार्य था जिसके तहत आरोपी को वह गिरफ्तार करने पहुँचे थे।

पुलिस दल पर हमले को करीब एक सप्ताह बीत गया है लेकिन अभी तक फरार आरोपियों को स्थानीय पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई है। वही इस मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह पुलिस पर हमले के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाना संदेह पैदा करता है। जबकि पुलिस प्रशासन कि यह चुप्पी डर की है या मिलीभगत की यह सवाल अब आम जनता पूछ रही है। तो दूसरी ओर एक दिसंबर 2025 से शुरू होने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र में विपक्ष द्वारा इस मामले को उठाए जाने की बात कही जा रही है।

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