भोपाल , जनवरी 9 -- मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सुप्रसिद्ध पुरातत्वविद् डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय पुरातत्व को जन आंदोलन में बदल दिया। डॉ. वाकणकर के प्रयासों से उज्जैन क्षेत्र में काल गणना का केंद्र डोंगला खोजा गया और भारत ही नहीं, यूरोप और अमेरिका में शैल चित्रों का अध्ययन कर उनका अमूल्य योगदान रहा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में 19वें डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय सम्मान समारोह और राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ किया। इस अवसर पर पद्मश्री से सम्मानित डॉ. प्रो. यशोधर मठपाल को 2 लाख रुपये के चेक, शॉल-श्रीफल और भू वराह की प्रतिकृति भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय सितार वादक और कवि लेखक की प्रस्तुति के साथ डॉ. वाकणकर की कविता का गायन हुआ।
मुख्यमंत्री ने "20वीं सदी में मध्यप्रदेश में स्वाधीनता आंदोलन 1920-1947" पुस्तक का विमोचन किया और पुरातत्व, दस्तावेज प्रबंधन एवं संग्रहालयों पर केंद्रित प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। उन्होंने कुम्हार के चाक पर स्वयं शिवलिंग की प्रतिकृति बनाकर भारतीय संस्कृति, कला और शिल्प परंपरा का सम्मान व्यक्त किया।
डॉ. यादव ने डॉ. वाकणकर द्वारा भीमबेटका के 30 हजार वर्ष पुराने शैलचित्रों का उत्खनन और अध्ययन, विभिन्न पुरातात्विक स्थलों के उत्खनन एवं प्राचीन सरस्वती नदी का सर्वेक्षण आदि उपलब्धियों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि डॉ. वाकणकर की विरासत को संजोते हुए उज्जैन में 14 जनवरी से महाकाल महोत्सव का आयोजन किया जाएगा और संग्रहालयों को आधुनिक तकनीकी व्यवस्थाओं से लैस किया जा रहा है। कार्यक्रम में सचिव पर्यटन, आयुक्त पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय, और राष्ट्रीय स्तर के प्रख्यात विचारक एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित