पुणे , मार्च 22 -- दिग्गज लेखिका, नाटककार और निर्देशक सई परांजपे के लिखित नाटकों के प्रतिष्ठित पात्र 'झाली काय गंमत' की 'सिंड्रेला' और 'शेपटीचा शाप' की 'रानी' यहां जीवंत हो उठे हैं।
बाल नाट्य महोत्सव की तैयारियों के बीच रविवार को आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान, उन भूमिकाओं को निभाने वाले बीते जमाने के कलाकारों ने नन्हे बाल कलाकारों के साथ संवाद किया।
यह अवसर श्रीमती परांजपे के 90वें जन्मदिन के समारोहों के हिस्से के रूप में 'संवाद पुणे' द्वारा आयोजित उनके छह बाल नाटकों के औपचारिक 'संहिता पूजन' (स्क्रिप्ट पूजा) का था। 18 अप्रैल से शुरू होने वाले इस महोत्सव में पुणे और उसके उपनगरों में इन नाटकों का प्रदर्शन किया जायेगा।
नाट्य महोत्सव में छह नाटकों को प्रदर्शित किया जायेगा- 'शेपटीचा शाप', 'झाली काय गंमत', 'पक्ष्यांचे कवी संमेलन', 'सलो की पलो', 'जादूचा शंख' और 'पत्ते नगरीत'। कार्यक्रम में गणमान्य व्यक्तियों और बाल कलाकारों के सभी छह नाटकों के पोस्टरों का अनावरण किया गया।
पत्रकार भवन में आयोजित संहिता पूजन समारोह का संचालन पुणे की अंजलि फड़के जोशी और संध्या देवरुखकर ने किया, जिन्होंने लगभग 60 साल पहले परांजपे के बाल नाटकों में क्रमशः 'सिंड्रेला' और 'रानी' की भूमिकाएं निभायी थीं।
इस कार्यक्रम में बाल साहित्यकार राजीव तांबे के साथ आयोजक सुनील महाजन, निकिता मोघे और निर्देशक देवेंद्र भिड़े सहित कई जानी-मानी हस्तियां शामिल हुईं। सुनील महाजन ने बताया कि यह महोत्सव पुणे के बाल रंगमंच क्षेत्र में सक्रिय पांच नाट्य समूहों के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। महोत्सव का उद्देश्य सई परांजपे के अतुलनीय योगदान को श्रद्धांजलि देते हुए दर्शकों तक उच्च गुणवत्ता वाला बाल रंगमंच पहुंचाना है।
अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए अंजलि फड़के जोशी ने साझा किया कि श्रीमती परांजपे के साथ उनका जुड़ाव 'बालोद्यान' में उनके समय के दौरान शुरू हुआ था, जिसके कारण उन्हें इन नाटकों में अभिनय करने का अवसर मिला। उन्होंने अपने रंगमंच के सफर को संवारने का श्रेय श्रीमती परांजपे को दिया।
संध्या देवरुखकर ने कहा कि श्रीमती परांजपे के काम ने बाल कलाकारों की पीढ़ियों को निखारने और मराठी भाषा एवं संस्कृति को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। उन्होंने कहा कि छह दशक बाद भी ये नाटक मजबूत सांस्कृतिक मूल्यों को स्थापित करने के साथ-साथ मनोरंजन करना जारी रखे हुए हैं।
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