पुणे , मार्च 15 -- वैश्विक स्तर पर युद्ध संबंधी व्यवधानों के कारण एलपीजी की कमी के बीच नेशनल केमिकल लेबोरेटरी (एनसीएल) के वैज्ञानिकों ने एलपीजी के विकल्प के रूप में डायमेथिल ईथर (डीएमई) गैस विकसित करने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है।
एनसीएल के वैज्ञानिक तिरुमलाईवामी राजा और उनकी टीम ने करीब दो दशकों के शोध के बाद डीएमई गैस के उत्पादन के लिए आवश्यक उत्प्रेरक (कैटेलिस्ट) विकसित किया है। इस कैटेलिस्ट की मदद से वैज्ञानिकों ने पायलट स्तर पर डीएमई गैस का उत्पादन भी शुरू कर दिया है। जारी विज्ञप्ति के अनुसार, फिलहाल पायलट परियोजना के तहत प्रतिदिन लगभग 250 किलोग्राम डीएमई गैस का उत्पादन किया जा रहा है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि औद्योगिक कंपनियों के सहयोग से बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू किया जाता है, तो डीएमई गैस को लगभग 8 प्रतिशत तक एलपीजी में मिलाया जा सकता है। इससे भारत की आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है और एलपीजी की कमी के समय यह एक प्रभावी समाधान साबित हो सकता है।
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