पटियाला , दिसंबर 30 -- यूथ अकाली दल के अध्यक्ष और हलका घनौर के इंचार्ज सरबजीत सिंह झिंजर ने सोमवार को आम आदमी पार्टी सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि पीसीएस (पंजाब सिविल सर्विसेज) परीक्षा में पंजाबी की भूमिका को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने इसे पंजाब के युवाओं को पीछे धकेलने और बाहरी राज्यों से आए उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाने की सोची-समझी साजिश बताया। सरबजीत सिंह झिंजर ने कहा कि अकाली सरकार के दौरान 2012, 2014 और 2015 में नियमित रूप से पीसीएस परीक्षाएं आयोजित की गई थीं और बाद में कांग्रेस सरकार ने भी 2018 और 2021 में यह प्रक्रिया जारी रखी। लेकिन आम आदमी पार्टी के शासन में बिना किसी स्पष्ट कारण के चार वर्षों का लंबा अंतर आ गया और अब 2025 में परीक्षा करवाई जा रही है, जो सरकार की मंशा और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि पहले पीसीएस प्रश्नपत्रों में 20 से 30 प्रतिशत तक प्रश्न पंजाब, पंजाबी भाषा, इतिहास और संस्कृति से जुड़े होते थे, जिससे स्थानीय उम्मीदवारों को उचित प्रतिनिधित्व मिलता था। लेकिन ताज़ा परीक्षा में पंजाबी को जानबूझकर हाशिये पर डाल दिया गया है। एक प्रश्नपत्र में 80 में से केवल 8 प्रश्न और दूसरे में 100 में से मात्र 5 प्रश्न पंजाब से संबंधित रखे गए, जो पंजाबी उम्मीदवारों के साथ खुले भेदभाव को दर्शाता है।

यूथ अकाली दल के अध्यक्ष ने कहा कि यह भारी कटौती कोई संयोग नहीं बल्कि बाहरी और गैर-पंजाबी उम्मीदवारों के लिए परीक्षा को अनुकूल बनाने की सोची-समझी कोशिश है, ताकि उन्हें पंजाब की प्रशासनिक व्यवस्था में शामिल किया जा सके और राज्य के अपने युवाओं के अधिकार छीने जा सकें।उन्होंने कहा, "पंजाबी पंजाब की राजभाषा है, इसके बावजूद इस सरकार ने पीसीएस परीक्षा में इसकी अहमियत को कमजोर किया है। वर्षों तक परीक्षा को टालना और फिर पंजाबी से जुड़े प्रश्नों को कम करना आम आदमी पार्टी की पंजाब-विरोधी और युवा-विरोधी मानसिकता को उजागर करता है।"झिंजर ने कहा कि पीसीएस के माध्यम से चुने जाने वाले अधिकारियों के लिए पंजाब के भौगोलिक क्षेत्रों, अर्थव्यवस्था, कृषि और सामाजिक ढांचे की जानकारी होना बेहद जरूरी है। लेकिन प्रश्नपत्र से जानबूझकर पंजाब के भूगोल और अर्थव्यवस्था को बाहर रखना इस बात की ओर इशारा करता है कि बाहरी राज्यों के उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि यह एक सच्चाई है कि जो विद्यार्थी पंजाब के गांवों, खेतों और ज़मीनी हकीकत से जुड़े होते हैं, वही राज्य की भूमि, कृषि व्यवस्था और सामाजिक संरचना को सही मायने में समझ सकते हैं। कोई भी बाहरी उम्मीदवार पंजाब की वास्तविकताओं को उस स्तर तक नहीं समझ सकता।

झिंजर ने बताया कि पंजाब जीके से जुड़े तीनों प्रश्न एक ही डोमेन - साहित्य - से पूछे गए, जिससे पाठ्यक्रम में विविधता का पूरी तरह अभाव दिखाई देता है। इससे परीक्षा की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि ग्रुप 'सी' की भर्तियों में बाहरी उम्मीदवारों के लिए पंजाब जीके के 20 अंक और पंजाबी व्याकरण के 15 अंक निर्धारित किए गए हैं, ताकि पंजाबी उम्मीदवारों को लाभ मिल सके। यदि यह नीति ग्रुप 'सी' में लागू की जा सकती है, तो ग्रुप 'ए' में इसे क्यों नहीं अपनाया गया? क्या पंजाबियों को केवल ग्रुप 'सी' तक ही सीमित रखना है? क्या ग्रुप 'ए' की नौकरियों पर पंजाब और पंजाबियों का कोई अधिकार नहीं है? इस परीक्षा में पंजाब के भौगोलिक क्षेत्रों से संबंधित एक भी प्रश्न न पूछा जाना इस बात को और मजबूत करता है कि बाहरी उम्मीदवारों को जानबूझकर फायदा पहुंचाया गया।

झिंजर ने कहा कि अपने राज्य के उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने का सबसे अच्छा उदाहरण पड़ोसी राज्य राजस्थान से मिलता है। अक्टूबर 2025 में हुई राजस्थान सिविल सेवा परीक्षा में 150 में से 43 प्रश्न राजस्थान सामान्य ज्ञान से पूछे गए, जो लगभग 30 प्रतिशत बनते हैं। इसका सीधा मतलब है कि राजस्थान लोक सेवा आयोग ने प्रारंभिक परीक्षा स्तर पर ही बाहरी उम्मीदवारों के लिए दरवाजे लगभग बंद कर दिए। इसके विपरीत पंजाब में एक हास्यास्पद और संदेहास्पद स्थिति पैदा की गई है। पंजाब के इतिहास, भूगोल, संस्कृति, अर्थव्यवस्था, गुरुमुखी और पंजाबी भाषा से जुड़े सवाल जानबूझकर नहीं पूछे गए, ताकि हर संभव तरीके से बाहरी उम्मीदवारों को अफसर बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि यह बेहद गंभीर बात है कि परीक्षा से पहले पंजाब लोक सेवा आयोग के सचिव ने स्पष्ट रूप से कहा था कि परीक्षा में पंजाब के इतिहास, भूगोल, संस्कृति और अर्थव्यवस्था को प्राथमिकता दी जाएगी। इसी भरोसे पर पंजाबी और ग्रामीण पृष्ठभूमि के उम्मीदवारों ने इन विषयों पर विशेष तैयारी की थी। लेकिन परीक्षा में इन सबको नजरअंदाज कर दिया गया, जिससे पंजाबी उम्मीदवारों के साथ खुला धोखा हुआ और बाहरी राज्यों के पसंदीदा उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाने वाला पेपर तैयार किया गया।

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